नई दिल्ली। सर्दियों के मौसम से पहले दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर प्रदूषण नियंत्रण उपायों को और मजबूत कर दिया है।
बयान के अनुसार, धूल प्रदूषण को कम करने के लिए करीब 60 वाटर स्प्रिंकलर और टैंकर, 14 एंटी-स्मॉग गन, 23 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें, दो ट्रैक्टर-माउंटेड झाड़ू और 900 से अधिक कर्मियों को तैनात किया गया है।
इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्गों के 157 किलोमीटर लंबे हिस्से पर 13 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें नियमित रूप से कार्य कर रही हैं।
एनएचएआई के सदस्य (तकनीकी) आलोक दीपांकर ने प्रदूषण नियंत्रण उपायों की समीक्षा करते हुए फील्ड टीमों को सभी उपकरणों, कर्मचारियों और पानी के छिड़काव की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने एंटी स्मॉग गन के नियमित संचालन और सड़कों की दैनिक मशीनों से सफाई पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। इसमें निर्माण सामग्री को ढककर रखना, सड़कों को धूल मुक्त बनाए रखना और लागू ग्रेप चरणों के अनुसार अतिरिक्त कदम उठाना शामिल है।
एनएचएआई अधिकारियों को गतिविधियों की रोजाना निगरानी करने और जियो-टैग्ड तस्वीरों के साथ प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया गया है।
समीक्षा बैठक में अर्बन एक्सटेंशन रोड-2, द्वारका एक्सप्रेसवे, डीएनडी-सोहना एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे जैसी प्रमुख यातायात सुगमता परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। एनएचएआई के अनुसार, ये परियोजनाएं दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक जाम और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद कर रही हैं।
बयान में कहा गया कि प्रस्तावित यातायात सुगमता परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने और ग्रीन दिल्ली ऐप तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए मिलने वाली जन शिकायतों का शीघ्र समाधान करने पर भी जोर दिया गया है।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अपनी पहल के तहत एनएचएआई ने वित्त वर्ष 2025-26 में एनसीआर क्षेत्र में 9.52 लाख पौधे लगाने के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 9.80 लाख पौधे लगाए हैं। इन पौधों की जीवित रहने की दर 90 प्रतिशत से अधिक बताई गई है।
इसके अलावा दिल्ली के लैंडफिल स्थलों से निकाली गई लगभग 13.58 लाख टन निष्क्रिय सामग्री का उपयोग यूईआर-2 और डीएनडी-सोहना कॉरिडोर के तटबंध निर्माण में किया गया है। इससे कचरे के टिकाऊ उपयोग को बढ़ावा मिला है।
एनएचएआई ने कहा कि वह सर्दियों के मौसम में दिल्ली-एनसीआर में धूल प्रदूषण कम करने, वायु गुणवत्ता बेहतर बनाने और यातायात को सुचारू रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
















