नई दिल्ली। मिल्की मिस्ट डेयरी फूड लिमिटेड ने अपनी आरएचपी (रेड डेरिंग प्रॉस्पेक्टस) में 229 करोड़ रुपए की संभावित देनादारियों, बिक्री के लिए दक्षिण भारत और तमिलनाडु से दूध की खरीद पर निर्भरता को प्रमुख जोखिम बताया है। मिल्की मिस्ट का आईपीओ 11 अगस्त से 13 अगस्त के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खोला हुआ है।

कंपनी ने बताया है कि वित्त वर्ष 2026 में उसके कच्चे दूध की खरीद का 94.5 प्रतिशत हिस्सा तमिलनाडु से आया था। इस वजह से खराब मौसम, मवेशियों में बीमारी फैलने, किसानों के विरोध-प्रदर्शन, पॉलिसी में बदलाव और राज्य में आपूर्ति की कमी जैसी रुकावटें कंपनी के लिए बड़ा जोखिम हैं।

इसके अलावा, मिल्की मिस्ट ने कहा कि तमिलनाडु में किसी भी बड़ी रुकावट से अच्छी क्वालिटी वाले दूध (जो उसका मुख्य कच्चा माल है) की पर्याप्त मात्रा में खरीद करने की उसकी क्षमता पर असर पड़ सकता है, और इससे प्रोडक्शन, बिक्री और मुनाफे को नुकसान हो सकता है।

आरएचपी में मिल्की मिस्ट ने आगे कहा कि कंपनी को एक ही इलाके पर निर्भरता का जोखिम का भी सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि वित्त वर्ष 2026 में इसके ऑपरेशन से होने वाली कुल कमाई का 69.2 प्रतिशत हिस्सा दक्षिण भारत से आया है।

कंपनी ने कहा कि इस इलाके में आर्थिक मंदी, प्रतिस्पर्धा का दबाव, ग्राहकों की पसंद में बदलाव, नियमों में बदलाव या प्राकृतिक आपदाओं का इसके कारोबार पर बहुत अधिक असर पड़ सकता है।

निर्भरता के मामले में, कंपनी ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2026 में पनीर, चीज और दही से कुल कमाई का 59.1 प्रतिशत हिस्सा आया।

इसके अलावा, कंपनी ने 31 मार्च, 2026 तक लगभग 229 करोड़ रुपए की आकस्मिक देनदारियों की जानकारी दी। इसमें एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (ईपीसीजी) स्कीम के तहत एक्सपोर्ट से जुड़ी देनदारियां, विवादित कानूनी देनदारियां और बैंक गारंटी शामिल हैं।

कुल आकस्मिक देनदारियों में से ईपीसीजी से जुड़ी देनदारियां 195 करोड़ रुपए की थीं।

मिल्की मिस्ट के अनुसार, अगर कंपनी इस स्कीम के तहत एक्सपोर्ट की शर्तों को पूरा नहीं कर पाती है, तो उसे ड्यूटी से मिले फायदों के साथ-साथ लागू ब्याज और पेनल्टी भी चुकानी पड़ सकती है।

कंपनी कई जीएसटी डिमांड्स का भी विरोध कर रही है। उसने बताया कि उसे इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम, क्लासिफिकेशन से जुड़े विवादों और अन्य मुद्दों से संबंधित टैक्स डिमांड्स मिली हैं, और उसने कुछ आदेशों को न्यायिक और अपीलीय अधिकारियों के सामने चुनौती दी है।

कंपनी ने बताया कि एक और बड़ा जोखिम कारोबार का एक ही जगह पर केंद्रित होना है। मिल्की मिस्ट का मुख्य मैन्युफैक्चरिंग प्लांट तमिलनाडु के पेरुंदुरई में है। अगर मशीनरी खराब होने, औद्योगिक दुर्घटनाओं, खराब मौसम या प्राकृतिक आपदाओं की वजह से कामकाज में रुकावट आती है, तो इससे प्रोडक्शन और बिजनेस के लगातार चलने पर असर पड़ सकता है।

कंपनी ने पैकेजिंग मटीरियल, चीनी, कल्चर और अन्य इनपुट की कीमतों में उतार-चढ़ाव से जुड़े जोखिमों के बारे में भी चेतावनी दी है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी के कुल आय में इनकी हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत थी। इनमें से ज्यादातर मटीरियल बिना किसी लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट के खरीदे जाते हैं, जिससे कंपनी को सप्लाई और कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम उठाना पड़ता है।