नई दिल्ली/भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार के कद्दावर मंत्री विजय शाह एक बार फिर अपने विवादित बयानों के चलते कानूनी शिकंजे में फंसते नजर आ रहे हैं। भारतीय सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया। कोर्ट ने मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने (अभियोजन स्वीकृति) में हो रही देरी को लेकर मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।
'दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण': सुप्रीम कोर्ट
मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, "यह सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। बस बहुत हो गया, अब हमारे आदेश का पालन करें।" कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि विशेष जांच दल (SIT) द्वारा अभियोजन की मंजूरी के लिए भेजा गया प्रस्ताव अभी तक लंबित क्यों है। पीठ ने स्पष्ट कहा कि एक राजनेता को पता होना चाहिए कि किसी महिला अधिकारी की गरिमा का सम्मान कैसे किया जाता है।
सॉलिसिटर जनरल के तर्क को कोर्ट ने नकारा
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने मंत्री का बचाव करते हुए तर्क दिया कि शायद उनके बयान को गलत समझा गया है और वे महिला अधिकारी की प्रशंसा करना चाहते थे। हालांकि, सीजेआई ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट का हवाला देते हुए यहाँ तक कह दिया कि मंत्री को इस तरह की टिप्पणियाँ करने की "आदत" है। कोर्ट ने आदेश दिया कि सबसे पहले माफी मांगी जानी चाहिए थी और अब इस मामले को चार सप्ताह बाद सूचीबद्ध किया जाएगा।
क्या था पूरा विवाद?
यह विवाद पिछले साल शुरू हुआ था, जब भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया था। इस ऑपरेशन की मीडिया ब्रीफिंग कर्नल सोफिया कुरैशी ने की थी। इसके बाद इंदौर के महू में आयोजित एक कार्यक्रम में मंत्री विजय शाह ने कहा था— "जिन्होंने हमारी बेटियों को विधवा किया, हमने उन्हें सबक सिखाने के लिए उनकी ही एक बहन को भेजा।" इस बयान को कर्नल कुरैशी के धर्म से जोड़कर देखा गया, जिसकी देशभर में कड़ी निंदा हुई और सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया था।
विवादित बयानों का रहा है पुराना नाता
मंत्री विजय शाह का विवादों से पुराना नाता रहा है, जिसका जिक्र सुनवाई के दौरान भी हुआ:
साल 2013: तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह पर अभद्र टिप्पणी के कारण उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
सितंबर 2022: राहुल गांधी के अविवाहित होने पर उन्होंने व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
साल 2023: बालाघाट में फिल्म शूटिंग के दौरान अभिनेत्री विद्या बालन को लेकर दिए गए उनके एक बयान और उसके बाद शूटिंग रुकवाने के मामले ने काफी तूल पकड़ा था।
अब क्या होगा आगे?
सुप्रीम कोर्ट की इस सख्ती के बाद अब मध्य प्रदेश सरकार के पास मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने के अलावा कम ही विकल्प बचे हैं। यदि सरकार चार सप्ताह के भीतर अभियोजन की स्वीकृति पर फैसला नहीं लेती है, तो कोर्ट इस पर और भी कड़े निर्देश जारी कर सकता है। इस घटनाक्रम ने प्रदेश की सियासत में हलचल तेज कर दी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर सेना की एक महिला अधिकारी के सम्मान से जुड़ा मामला है।



