नई दिल्ली। रक्त (खून) एक जरूरी तरल संयोजी ऊतक है, जो शरीर को जीवित रखने और सुचारू रूप से काम करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मानव शरीर में खून की तीन मुख्य प्रकार की कोशिकाएं होती हैं, जो शरीर की सेहत और कार्यक्षमता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।मानव रक्त में आरबीसी (लाल रक्त कणिकाएं), डब्ल्यूबीसी (श्वेत रक्त कणिकाएं) और प्लेटलेट्स तीन मुख्य प्रकार की कोशिकाएं होती हैं। शरीर में आरबीसी का काम फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के सभी अंगों और ऊतकों तक पहुंचाना एवं कार्बन डाइऑक्साइड को वापस लाना है। डब्ल्यूबीसी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) को मजबूत करती हैं और शरीर को संक्रमण तथा बीमारियों से बचाने के साथ लड़ने में मदद करती हैं। वहीं, प्लेटलेट्स रक्त का थक्का जमाने में मदद करती हैं, जिससे चोट लगने पर ज्यादा खून न बहे।
सुरक्षित रक्त की आवश्यकता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और स्वैच्छिक रक्तदाताओं का आभार व्यक्त करने के लिए प्रत्येक वर्ष 1 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत सबसे पहले 1 अक्टूबर 1975 को डॉ. जय गोपाल जॉली के मार्गदर्शन में इंडियन सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन एंड इम्यूनोहेमेटोलॉजी द्वारा की गई थी।
राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस का उद्देश्य सुरक्षित रक्त की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना, स्वैच्छिक दाताओं का सम्मान करना और रक्तदान को लेकर लोगों के मन से डर व भ्रांतियों को दूर करना है। इस वर्ष राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस की थीम 'मानवता की एक बूंद- रक्तदान करें- जीवन बचाएं' है।
राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस को लेकर देशभर में मेडिकल संस्थानों द्वारा विभिन्न जागरूकता अभियान और शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि सुरक्षित रक्त की आवश्यकता के प्रति लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाई जाए और स्वेच्छा से रक्तदान करने के लिए उन्हें प्रेरित किया जा सके।
राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के खास अवसर पर, अगर कोई व्यक्ति रक्तदान करना चाहता है, तो व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ होना चाहिए। उनकी आयु 18 से 60 वर्ष के बीच और वजन 45 किलोग्राम से अधिक हो। उनका हीमोग्लोबिन का स्तर 12.5 प्रतिशत से अधिक और वे कोई गंभीर या असाध्य बीमारी से ग्रसित नहीं होने चाहिए।
बता दें कि रक्त मुख्य रूप से 8 प्रकार का होता है। उनमें ए-पॉजिटिव, ए-नेगेटिव, बी-पॉजिटिव, बी-नेगेटिव, एबी-पॉजिटिव, एबी-नेगेटिव, ओ-पॉजिटिव और ओ-नेगेटिव (ओ-) हैं। इन ब्लड ग्रुप में ओ-नेगेटिव ऐसा रक्त समूह है, जो अपना खून किसी भी ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को दे सकता है। इसलिए ओ-नेगेटिव रक्त समूह वाले व्यक्ति को सार्वभौमिक दाता (यूनिवर्सल डोनर) कहा जाता है। वहीं, एबी-पॉजिटिव रक्त समूह वाले व्यक्ति किसी भी ब्लड ग्रुप से रक्त ले सकते हैं। इसलिए इन्हें सार्वभौमिक ग्राही (यूनिवर्सल रिसिपिएंट) कहते हैं।














