उज्जैन, अशोक दायमा। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन प्रवास पर पहुँचीं अहमदाबाद निवासी सुश्री नेहा भट्ट की कहानी संघर्ष, अदम्य साहस और अटूट शिव भक्ति की एक अद्भुत मिसाल बन गई है। वर्ष 2021 में एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में अपना एक पैर गंवाने के बावजूद नेहा ने जीवन से हार नहीं मानी, बल्कि अपने बुलंद हौसलों और इच्छाशक्ति के दम पर दुनिया के सामने प्रेरणा की नई मिसाल पेश की है। शारीरिक अक्षमता को अपनी राह का रोड़ा न बनने देते हुए नेहा ने कठिन से कठिन धार्मिक यात्राओं को पैदल पूरा कर दिखाया है।


22 किमी केदारनाथ और 18 किमी अमरनाथ की पैदल यात्रा पूरी की

नेहा भट्ट ने अपने संकल्प और भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था के बल पर वर्ष 2025 में 22 किलोमीटर की अत्यंत दुर्गम केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की। इसके बाद भी उनका सफर थमा नहीं और वर्ष 2026 में उन्होंने 18 किलोमीटर लंबी कठिन अमरनाथ यात्रा भी पैदल पूरी कर अपने जज्बे का लोहा मनवाया। एक कृत्रिम/सहायक साधन के सहारे इतनी दुर्गम और उच्च हिमालयी ट्रैकिंग को पैदल पूरा करना सामान्य व्यक्ति के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है, जिसे नेहा ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से संभव कर दिखाया।

उज्जैन प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए नेहा भट्ट ने अपने संघर्ष के पन्नों को साझा किया। उन्होंने कहा कि जीवन में परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी विपरीत और कठिन क्यों न हों, व्यक्ति को कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।

उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि शारीरिक या मानसिक चुनौतियाँ मंजिल की राह में अस्थायी बाधाएँ हो सकती हैं, लेकिन यदि आपका संकल्प मजबूत है, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है। युवाओं को कठिनाइयों से डरने के बजाय दृढ़ निश्चय के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहना चाहिए।


महाकाल की नगरी में नेहा की उपलब्धि की सराहना

नेहा भट्ट का यह प्रेरणादायी सफर उन सभी लोगों के लिए एक नया प्रकाश स्तंभ है, जो किसी हादसे या कठिन परिस्थिति के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। उज्जैन पहुँचने पर स्थानीय नागरिकों, पत्रकारों और सामाजिक संगठनों ने उनकी इस अद्भुत शिव भक्ति, साहस और जीवटता की सराहना की तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।