भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को बताया कि 'इंडिया केम 2026' में शामिल होने के लिए उनकी दो दिवसीय मुंबई यात्रा के दौरान नौ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) और चार निवेश प्रस्तावों पर हस्ताक्षर किए गए। इससे राज्य में 53,893.51 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव आया है और 20,210 नौकरियों के अवसर पैदा होने की संभावना बनी है।'टीम ओडिशा' का नेतृत्व करने वाले मुख्यमंत्री माझी, 22 और 23 अक्टूबर को आयोजित केमिकल और पेट्रोकेमिकल कॉन्क्लेव में हिस्सा लेने के बाद शुक्रवार शाम भुवनेश्वर लौट आए।

मीडिया को जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने केंद्र सरकार और फिक्की (एफआईसीसीआई) के साथ अगले साल ओडिशा में इस सम्मेलन की मेजबानी करने को लेकर चर्चा की थी, और दोनों ने इसके लिए अपनी सहमति दे दी है। इस मौके पर माझी ने यह भी घोषणा की कि अगले साल अक्टूबर में 'ओडिशा केम 2027' का आयोजन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कार्यक्रम के दौरान विभिन्न कारोबारी दिग्गजों के साथ 25 आमने-सामने (वन-टू-वन) बैठकें हुईं। उन्होंने पोस्को इंडिया, जेएसडब्ल्यू और एलएंडटी जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ अमेरिका और यूरोपीय संघ की कंपनियों के साथ भी चर्चा की।

इस कार्यक्रम के दौरान हुए प्रमुख समझौतों (एमओयू) में से एक के तहत, ओडिशा सरकार ने एनएलसी इंडिया लिमिटेड के साथ एक समझौता किया। एनएलसी इंडिया लिमिटेड, कोयला मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में आने वाला एक 'नवरत्न' केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। यह समझौता केमिकल और ऊर्जा क्षेत्र में 36,763.51 करोड़ रुपए के प्रस्तावित निवेश के लिए किया गया है।

माझी ने कहा, "इन चर्चाओं के जरिए, उनकी जरूरतों को समझने के साथ-साथ उन्हें यह भी पता चला कि ओडिशा में निवेश करने के लिए क्या सुविधाएं और अवसर मौजूद हैं। इससे संभावित निवेशकों के साथ बेहतर समझ बनाने में मदद मिली है। इन कंपनियों की ओडिशा में निवेश करने में गहरी रुचि है।"

मुख्यमंत्री ने कंपनियों के साथ इन चर्चाओं को संभव बनाने में केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा द्वारा दिए गए मजबूत समर्थन के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री माझी ने आगे कहा, "इस सम्मेलन ने हमें अपनी अर्थव्यवस्था को धातु-आधारित से बदलकर रसायन-आधारित बनाने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने में मदद की है। ओडिशा में धातु, मेटल डाउनस्ट्रीम, रसायन, पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक जैसे सभी प्रकार के परस्पर जुड़े उद्योगों की स्थापना करके एक संपूर्ण औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा। इससे ओडिशा, 'आत्मनिर्भर भारत' के निर्माण के लक्ष्य को हासिल करने में एक मजबूत स्तंभ बन सकेगा।"