नई दिल्ली, 11 मई । डायन प्रथा के खिलाफ संघर्ष कर समाज में अलग पहचान बनाने वाली पद्मश्री सम्मानित छुटनी महतो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से की गई सात अपीलों का खुलकर समर्थन किया है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की ये अपीलें केवल सरकार के लिए नहीं बल्कि देश की आर्थिक मजबूती, नागरिकों की सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी हैं।
झारखंड में सरायकेला की पद्मश्री अवॉर्डी छुटनी महतो ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मोदी हैं तो मुमकिन है। प्रधानमंत्री ने जो सात अपीलें की हैं, उन्हें देश के सभी नागरिकों को मानना चाहिए। यह अपील किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि, देशहित और आम लोगों के कल्याण के लिए की गई है।
उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं से खाद्य तेल का कम उपयोग करने की प्रधानमंत्री मोदी की अपील का समर्थन करते हुए कहा कि इससे घरेलू बजट पर बोझ कम होगा और लोगों की सेहत भी बेहतर रहेगी।
छुटनी महतो ने कहा कि आज के समय में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है। स्वदेशी अपनाने और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की बात पर उन्होंने कहा कि पहले वे भी बाहर जाकर कई कार्य करती थीं, लेकिन अब अधिकतर काम घर से ही करती हैं। यदि लोग स्वदेशी वस्तुओं को अपनाएंगे तो इससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने लोगों से प्रधानमंत्री की अपील को गंभीरता से लेने और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सहयोग करने की अपील की।
वहीं, मुरादाबाद के पद्मश्री चिरंजीलाल यादव ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान पीएम मोदी की अपील का समर्थन करते हुए कहा कि ये देशहित और आर्थिक मजबूती की नई दिशा तय करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। पीएम मोदी को इस पहल के लिए बधाई देता हूं। देश की जनता इन चीजों से जागरूक नहीं थी।
चिरंजीलाल ने पीएम मोदी की नेशन फर्स्ट की अपील को लेकर कहा कि देश को प्राथमिकता देने से ही विकास होगा। यह कदम देश की अर्थव्यस्था को मजबूत बनाने वाला है। स्वदेशी उत्पादों के इस्तेमाल से भारत का पैसा देश में ही रह जाएगा और अर्थव्यवस्था में वृद्धि होगी।
उन्होंंने कहा कि पीएम मोदी ने देश के पर्यटन को बढ़ाने की अपील की है। हमारे देश में ही घूमने के लिए अच्छी जगह है, ऐसे में लोगों को विदेश जाने की जरूरत नहीं है। इस तरह से देश का पैसा भारत में रहने से उन्नति और विकास को पंख लगेंगे।




