छतरपुर, सुबोध त्रिपाठी। छतरपुर के विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट की न्यायाधीश श्रीमती कविता वर्मा ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी कन्हैया उर्फ कुनैल श्रीवास (उम्र 20 वर्ष) को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 87 में 7 वर्ष का सश्रम कारावास व 1,000 रुपये अर्थदंड तथा बीएनएस की धारा 64(1) में 10 वर्ष का सश्रम कारावास व 2,000 रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। इसके साथ ही अदालत ने पीड़िता को प्रतिकर योजना के तहत सहायता राशि प्रदान करने की अनुशंसा भी की है।
प्रकरण की जानकारी देते हुए विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो एक्ट) नर्मादांजलि दुबे ने बताया कि यह पूरा मामला थाना सिविल लाइन छतरपुर से संबंधित था। पीड़िता ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी कन्हैया उर्फ कुनैल श्रीवास उसे अपनी मोटरसाइकिल पर जबरन बच्चा जेल के पास स्थित अपने मकान में ले गया और वहां उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। शिकायत के आधार पर सिविल लाइन पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर उपनिरीक्षक कांति जाटव एवं उपनिरीक्षक नेहा सिंह गुर्जर की विवेचना टीम द्वारा पीड़िता, उसके माता-पिता और गवाहों के बयान दर्ज किए। पुलिस ने घटनास्थल का नक्शा मौका तैयार कर आरोपी को गिरफ्तार किया और दोनों का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद चालान अदालत में पेश किया।
अदालत में विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपी को कठोर सजा दिलाने के लिए कुल 16 गवाहों का परीक्षण कराया और 27 दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर साबित किए। बचाव पक्ष द्वारा भी अपनी सफाई में पांच दस्तावेज पेश किए गए थे। अदालत ने दोनों पक्षों के मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों और अंतिम तर्कों को सुनने के उपरांत आरोपी कन्हैया उर्फ कुनैल श्रीवास को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई और जेल भेजने का आदेश दिया।




