मुंबई। उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने गुरुवारर को कहा कि आने वाले वर्षों में भारत का प्राइवेट क्रेडिट बाजार तेजी से विस्तार करेगा। इसके पीछे बढ़ती जागरूकता, नियामकीय समर्थन, डिजिटल नवाचार और वैकल्पिक वित्तपोषण की बढ़ती मांग प्रमुख कारण होंगे।आईवीसीए प्राइवेट क्रेडिट समिट 2026 के दौरान न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि प्राइवेट क्रेडिट अब पारंपरिक बैंक ऋण का एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है। खासकर स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और मिड-मार्केट कंपनियों को लचीली फंडिंग उपलब्ध कराने में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।

आविष्कार कैपिटल की पार्टनर और आईवीसीए प्राइवेट क्रेडिट काउंसिल की सह-अध्यक्ष मोनू जैन ने कहा कि इस समिट का मुख्य उद्देश्य प्राइवेट क्रेडिट के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि तेज़ विकास की संभावनाओं के बावजूद यह क्षेत्र अभी भी अपेक्षाकृत छोटा है।

उन्होंने कहा, "इस समिट में फंड, निवेशक और पूरे इकोसिस्टम से जुड़े लोग एक साथ आए हैं, ताकि वे प्राइवेट क्रेडिट के विभिन्न स्वरूपों, इसके उपयोगकर्ताओं, उधार लेने वाली कंपनियों की तैयारी और इस पूरे तंत्र को सहयोग देने वाले संस्थानों को बेहतर ढंग से समझ सकें।"

आईवीसीए के अध्यक्ष रजत टंडन ने कहा कि प्राइवेट क्रेडिट अब वित्त जुटाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है, क्योंकि स्टार्टअप और ग्रोथ-स्टेज कंपनियां अपनी हिस्सेदारी (इक्विटी) कम किए बिना कर्ज के जरिए पूंजी जुटाने को प्राथमिकता दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि जहां पारंपरिक बैंक आमतौर पर संपार्श्विक (कोलेटरल) के आधार पर ऋण देते हैं, वहीं वेंचर डेट और प्राइवेट क्रेडिट कारोबार के अलग-अलग चरणों में कंपनियों को अधिक लचीले वित्तपोषण विकल्प उपलब्ध कराते हैं।

रजत टंडन ने कहा, "रियल एस्टेट क्षेत्र में होने वाले कुल निवेश का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा आज प्राइवेट क्रेडिट के माध्यम से आ रहा है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने प्राइवेट लेंडिंग से जुड़े कुछ नियमों में भी बदलाव किए हैं, जो इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं।"

डिजिटलीकरण पर उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जानकारी तक आसान पहुंच से विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र के लिए फंडिंग प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी हो रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस इकोसिस्टम के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा और डिजिटल जानकारी के जिम्मेदार उपयोग पर विशेष ध्यान देना होगा।

वहीं, सुंदरम अल्टरनेट्स के प्रबंध निदेशक कार्तिक आत्रेय ने प्राइवेट क्रेडिट को एक उभरता हुआ एसेट क्लास बताया, जो धीरे-धीरे निवेशकों के मुख्य निवेश पोर्टफोलियो का हिस्सा बन रहा है।

उन्होंने कहा, "प्राइवेट क्रेडिट एक उभरता हुआ निवेश विकल्प है, जो धीरे-धीरे मुख्यधारा के निवेश का हिस्सा बनता जा रहा है, खासकर भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार में।"

कार्तिक आत्रेय ने कहा कि बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) या डेट म्यूचुअल फंड जैसे पारंपरिक फिक्स्ड-इनकम निवेश विकल्पों की तुलना में प्राइवेट क्रेडिट निवेशकों को दो अंकों (डबल डिजिट) का रिटर्न देने की क्षमता रखता है।