नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने शनिवार को "जनहित" में 5 ग्रुप 'ए' अधिकारियों को समय से पहले सेवानिवृत्त करने की सिफारिश की है। इन अधिकारियों पर संदिग्ध सत्यनिष्ठा, सतर्कता इनपुट, अनुशासनात्मक इतिहास और अन्य सेवा रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई की गई है।

रेलवे के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, "समीक्षा समितियों ने आईआरएचएस के 2 एसएजी अधिकारी, उत्तरी रेलवे के आईआरएसई के 1 जेएजी अधिकारी, उत्तरी रेलवे के आईआरएसईई के 1 अधिकारी और पश्चिमी रेलवे के आईआरटीएस के 1 जेएजी अधिकारी को समय से पहले सेवानिवृत्त करने की सिफारिश की है।"

बयान में कहा गया कि भारतीय रेलवे भ्रष्टाचार, सत्यनिष्ठा की कमी और अक्षमता के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाता है।

बयान में कहा गया, "लोक सेवा में सत्यनिष्ठा, अनुशासन और जवाबदेही गैर-परक्राम्य हैं। भारतीय रेलवे स्थापना संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत की गई यह कार्रवाई इन्हीं मूल्यों को बनाए रखने के लिए है।

रेलवे ने बताया कि यह फैसला भारतीय रेलवे स्थापना संहिता, खंड-II के नियम 1802(ए) के तहत लिया गया है। यह नियम मूलभूत नियमों के नियम 56(जे) के बराबर है।

समीक्षा समितियों ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड का विस्तृत आकलन किया। इसमें वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट, सत्यनिष्ठा रिकॉर्ड, सतर्कता इनपुट, अनुशासनात्मक इतिहास और अन्य प्रासंगिक सेवा रिकॉर्ड की जांच शामिल थी।

समितियों ने संबंधित मामलों में जनहित में इन अधिकारियों की समय से पहले सेवानिवृत्ति की सर्वसम्मति से सिफारिश की।

इस बीच केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) की भर्ती प्रक्रिया को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिक पारदर्शी, सटीक और तकनीक आधारित प्रणाली की जरूरत पर जोर दिया।

भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 47,084 रिक्तियों में से 43,781 उम्मीदवारों की भर्ती पूरी कर ली है। यह भर्ती 6 प्रमुख श्रेणियों में हुई है।

इसमें असिस्टेंट लोको पायलट की 18,799, टेक्नीशियन की 14,298, सब-इंस्पेक्टर की 452, कांस्टेबल की 4,208, जूनियर इंजीनियर/डीएमएस/सीएमए की 7,951 और पैरामेडिकल श्रेणी की 1,376 रिक्तियां शामिल हैं।