भोपाल। रानी कमलापति (भोपाल) से ग्वालियर होते हुए हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली) जाने वाली देश की प्रतिष्ठित वंदे भारत एक्सप्रेस जल्द ही बिल्कुल नए रंग-रूप और उन्नत सुविधाओं के साथ यात्रियों के बीच होगी। ट्रेन के बाहरी हिस्से को पारंपरिक नीले और सफेद रंग की जगह अब आकर्षक केसरिया रंग दिया जा रहा है। इस बड़े बदलाव और सौंदर्यीकरण कार्य के लिए ट्रेन को झांसी की वैगन रिपेयर वर्कशॉप भेजा गया है, जहां अत्याधुनिक तकनीकों के सहारे ट्रेन का कायाकल्प किया जा रहा है। झांसी रेल मंडल के इतिहास में पहली बार इतने बड़े स्तर पर किसी वंदे भारत एक्सप्रेस का मेकओवर किया जा रहा है।


अत्याधुनिक रोबोटिक पेंटिंग से निखर रहा है नया लुक

झांसी की वैगन रिपेयर वर्कशॉप में वंदे भारत के कोचों को नया लुक देने के लिए अत्याधुनिक रोबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है। रेलवे प्रशासन के अनुसार, रोबोटिक तकनीक से की जा रही पेंटिंग के कारण पेंट की गुणवत्ता बेहद शानदार और उच्च स्तर की होगी। इससे पूरी ट्रेन के बाहरी हिस्से को एक समान फिनिशिंग मिलेगी और यह पेंट लंबे समय तक खराब नहीं होगा। आधुनिक तकनीक के समावेश से यह पूरी प्रक्रिया न केवल बेहद तेज गति से पूरी हो रही है, बल्कि इसमें सटीकता भी काफी अधिक है।


केवल बाहरी आवरण ही नहीं, ट्रेन के इंटीरियर में भी हो रहे बड़े बदलाव

यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए केवल ट्रेन का बाहरी रंग ही नहीं बदला जा रहा, बल्कि इसके अंदरूनी हिस्से (इंटीरियर) और तकनीकी पहलुओं में भी कई महत्वपूर्ण सुधार किए जा रहे हैं। लंबी यात्रा के दौरान यात्रियों को और अधिक आराम देने के लिए सीटों में पहले के मुकाबले अधिक कुशनिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही, एग्जीक्यूटिव चेयर कार श्रेणी की सीटों में फुटरेस्ट के आकार को बड़ा किया गया है ताकि पैर फैलाने में आसानी हो। यात्रियों की सहूलियत के लिए कोच के भीतर चार्जिंग पॉइंट्स की स्थिति में सुधार किया गया है जिससे उन तक पहुंच और आसान हो सके। इसके अलावा, कोच के भीतर लगे वॉश बेसिन की गहराई को बढ़ाया गया है ताकि पानी बाहर न झटके और टॉयलेट के अंदर बेहतर दृश्यता के लिए अब अधिक रोशनी वाली नई एलईडी (LED) लाइटिंग लगाई जा रही है।


महज साढ़े सात घंटे में 708 किलोमीटर का सफर

यह वंदे भारत एक्सप्रेस रानी कमलापति स्टेशन से हजरत निजामुद्दीन के बीच की 708 किलोमीटर की कुल दूरी को महज 7 घंटे 30 मिनट में तय कर लेती है। इसी सफर को पूरा करने में देश की अन्य सुपरफास्ट या एक्सप्रेस ट्रेनों को लगभग 9 से 10 घंटे का समय लगता है। अपनी गति और समयबद्धता के लिए जानी जाने वाली यह प्रीमियम ट्रेन मध्य प्रदेश और दिल्ली के बीच भोपाल, झांसी, ग्वालियर और आगरा कैंट जैसे प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव लेते हुए चलती है।


मेक इन इंडिया की पहचान और बेहतर यात्रा का संकल्प

वंदे भारत एक्सप्रेस पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है, जिसे 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत भारत में ही डिजाइन और निर्मित किया गया है। अपनी आधुनिक कवच सुरक्षा प्रणाली, तेज रफ्तार और विश्वस्तरीय यात्री सुविधाओं के कारण यह आज भारतीय रेलवे की सबसे प्रतिष्ठित ट्रेनों की सूची में शीर्ष पर है। झांसी रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) मनोज कुमार सिंह ने बताया कि रानी कमलापति-हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत को नए केसरिया रंग में तैयार करने के साथ-साथ यात्रियों के फीडबैक के आधार पर कई तकनीकी सुधार भी किए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में यात्रियों को यात्रा का पहले से कहीं अधिक आरामदायक और सुखद अनुभव मिल सके।