मुंबई। मशहूर संगीतकार और गायक शंकर महादेवन ने बताया कि गायक अपने लोकप्रिय गानों के बोल कई बार क्यों भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई गाना सुपरहिट हो जाता है तो गायक का ध्यान स्वाभाविक रूप से नए गानों और नई धुनों पर चला जाता है, जिससे पुराने गाने उनकी प्राथमिकता में नहीं रहते।

शंकर महादेवन ने हाल ही में एहसान नूरानी, लॉय मेंडोंसा, प्लेबैक सिंगर शान और मेयांग चांग के साथ बातचीत की। यह खास बातचीत फिल्म ‘दिल चाहता है’ के 25 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित की गई थी।

स्पोटिफाई के लिए बनाए गए इस विशेष वीडियो में शान ने सवाल किया कि वह अपने ही गानों के बोल कई बार क्यों भूल जाते हैं। इस पर शंकर महादेवन ने समझाते हुए कहा कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गायक उस गाने को पहले ही गा चुका होता है और वह गाना लोकप्रिय या सुपरहिट हो चुका होता है। इसके बाद गायक आगे बढ़ जाता है और उस गाने को लेकर उसका फोकस पहले जैसा नहीं रहता।

शंकर ने कहा कि जब कोई गाना नया होता है, नई धुन और नए बोल होते हैं, तब गायक का पूरा ध्यान उसमें लगा रहता है। वह इस बात को लेकर भी बेहद सतर्क रहता है कि उससे कोई गलती न हो। इसलिए नए गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान गलतियां होने की संभावना कम रहती है।

बातचीत के दौरान शान ने भी इससे जुड़ा एक मजेदार किस्सा शेयर किया। उन्होंने बताया कि एक रिकॉर्डिंग सेशन के दौरान वह खुद ही गाने के बोल बनाने लगे थे। इसके बाद उन्होंने गीतकार जावेद अख्तर से संकोच के साथ पूछा कि क्या सब कुछ ठीक है।

शान के मुताबिक, जावेद अख्तर ने उनसे कहा, “आप खुद लिख रहे हैं।” शुरुआत में शान को उनकी बात समझ नहीं आई। इसके बाद जावेद अख्तर ने स्पष्ट करते हुए कहा कि ये सभी उनके ही गाने हैं।

शान ने बताया कि उन्होंने जवाब दिया कि इन गानों के बोल तो उन्होंने नहीं लिखे थे। इस पर जावेद अख्तर ने कहा कि शान खुद ही अपनी ओर से नई पंक्तियां बना रहे थे। इस किस्से ने बातचीत को और दिलचस्प बना दिया।

फरहान अख्तर के निर्देशन में बनी ‘दिल चाहता है’ ने हाल ही में रिलीज के 25 साल पूरे किए हैं। यह फिल्म फरहान अख्तर के निर्देशन में पहली फिल्म थी और आधुनिक हिंदी सिनेमा में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाने में सफल रही।

फिल्म में शहरी दोस्ती, प्रेम और युवाओं की स्वतंत्र सोच को जिस अंदाज में पेश किया गया, उसने दर्शकों की एक पूरी पीढ़ी को प्रभावित किया। फिल्म में दोस्तों की गोवा रोड ट्रिप भी खास तौर पर लोकप्रिय हुई और समय के साथ यह युवाओं के लिए दोस्तों के साथ ऐसी यात्रा करने की प्रेरणा बन गई।

फिल्म की दृश्य शैली, कैजुअल फैशन और बातचीत पर आधारित कहानी कहने के अंदाज ने भी समकालीन शहरी भारत को बॉलीवुड में दिखाने के तरीके को प्रभावित किया। फिल्म का संगीत भी बेहद चर्चित रहा, जिसमें रॉक, पॉप और भारतीय संगीत के तत्वों का मिश्रण देखने को मिला।