नई दिल्ली। आयुर्वेद अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (एनसीआईएसएम) ने दो बड़ी पहल शुरू की हैं। एनसीआईएसएम की अध्यक्ष प्रो. मनीषा कोठेकर ने केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) के स्पार्क (एसपीएआरके) 5.0 और सीसीआरएएस आयुर्शोध 2026 का शुभारंभ किया।
इन पहलों का उद्देश्य स्नातक छात्रों के बीच अनुसंधान को बढ़ावा देना और विद्वतापूर्ण उत्कृष्टता, शोध संचार और नवाचार को मान्यता देकर आयुर्वेद में रिसर्च के इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
एसपीएआरके 5.0 यानी स्टूडेंटशिप प्रोग्राम फॉर आयुर्वेद रिसर्च केन का पांचवां संस्करण, है। यह कार्यक्रम 2026-27 के लिए शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद के स्नातक छात्रों को शोध पद्धतियों और तकनीकों से परिचित कराना है। इसके तहत छात्र अल्पकालिक स्वतंत्र शोध परियोजनाओं पर काम करेंगे।
इस कार्यक्रम से बीएएमएस छात्रों में शोध की योग्यता, विश्लेषणात्मक सोच और करियर के रूप में अनुसंधान में शुरुआती रुचि को बढ़ावा मिलेगा।
इस बार कुल 300 स्टूडेंटशिप दी जा रही हैं। प्रत्येक छात्र को 50,000 रुपए की वित्तीय सहायता मिलेगी। एनसीआईएसएम और भारत सरकार से मान्यता प्राप्त कॉलेजों या विश्वविद्यालयों में तृतीय, चतुर्थ और व्यावसायिक वर्ष में पढ़ रहे बीएएमएस छात्र इसके लिए पात्र हैं।
इसके लिए पंजीकरण 15 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा और आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 15 नवंबर 2026 है।
सीसीआरएएस आयुर्शोध आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध योगदानों को मान्यता देने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। इसमें तीन श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाएंगे।
पहली श्रेणी है सीसीआरएएस-प्रबोध, जिसमें 3 मिनट की थीसिस प्रस्तुतियों के माध्यम से शोध का संचार और प्रस्तुतीकरण करना होगा। दूसरी श्रेणी सीसीआरएएस-प्रकाश है, जिसमें मूल अनुसंधान पर आधारित प्रकाशनों के माध्यम से विद्वतापूर्ण उपलब्धियों को मान्यता दी जाएगी। तीसरी श्रेणी सीसीआरएएस-नवोन्मेष है, जिसमें नवोन्मेषी प्रोटोटाइप, नए समाधान, प्रक्रियात्मक नवाचार और परिवर्तनकारी शोध पद्धतियों को मान्यता दी जाएगी।
द्वितीय सर्कुलर में पुरस्कारों का विवरण दिया गया है, जिसमें श्री धूतपापेश्वर लिमिटेड द्वारा प्रायोजित पुरस्कार राशि भी शामिल है। सीसीआरएएस आयुर्शोध का फाइनल 11 दिसंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा।
इस शुभारंभ कार्यक्रम में सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रो. रबीनारायण आचार्य, श्री धूतपापेश्वर लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और सीईओ डॉ. रणजीत पुराणिक, एनसीआईएसएम के विभिन्न बोर्डों के अध्यक्ष और देश भर के सीसीआरएएस संस्थानों के प्रमुख उपस्थित थे।
इन पहलों से उभरती हुई अनुसंधान प्रतिभाओं को निखारने और आयुर्वेद अनुसंधान को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।














