बालाघाट, रितेश सोनी। बालाघाट जिले की किरनापुर जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मौदा में वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीणों, वर्तमान पंचों तथा पूर्व सरपंच ने एकजुट होकर वर्तमान सरपंच मनमोहन वैध पर बिना कोई कार्य कराए फर्जी बिल लगाकर लगभग 19 लाख से अधिक की राशि आहरित करने का आरोप लगाया है। मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों को शिकायत सौंपी है।
बिना गट्टू लगाए 2.39 लाख का भुगतान और फर्जी जिओ टैगिंग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मौदा पंचायत में आंगनवाड़ी परिसर में बिना गट्टू (पेवर ब्लॉक) लगाए ही सरपंच द्वारा लगभग 2.39 लाख रुपये आहरित कर लिए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि बिना निर्माण कार्य के ही कागजों पर जिओ टैगिंग भी पूर्ण दर्शा दी गई। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि आखिर बिना काम हुए जिओ टैगिंग कैसे संभव हुई और राशि का भुगतान कैसे हो गया?
पंच और भृत्य के खातों के जरिए राशि निकालने का आरोप
पंचायत के पंच लाकेश्वर जुंजारे ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर स्वल्पाहार के नाम से 10 हजार रुपये का बिल लगाया गया था। यह राशि किसी दुकानदार के बजाय पंच के खाते में यह कहकर स्थानांतरित की गई कि "गलती से पैसे चले गए हैं, आप निकालकर दे दें, नाश्ते वाले को भुगतान करना है।"
इसी तरह पंचायत के भृत्य (चपरासी) फिरोज रंगारे ने खुलासा किया कि सरपंच मनमोहन वैध ने उनके खाते में भी 50 हजार रुपये यह कहते हुए डाले कि "सीसी सड़क का ठेका लिया है, जिसका लेबर पेमेंट करना है।" भृत्य से राशि वापस ले ली गई। फिरोज रंगारे ने खुद माना कि इस तरह पंचायत की राशि व्यक्तिगत खातों में डालकर निकालना सरासर गलत है।
एक ही व्यक्ति के खाते में 10 लाख से अधिक का भुगतान
शिकायतकर्ता त्रिवेणी बनकर ने बताया कि सरपंच द्वारा एक ही व्यक्ति हितेश गजभिए के खाते में 10 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। नाली सफाई, स्ट्रीट लाइट रखरखाव से लेकर निर्माण कार्यों में पानी की तराई तक का सारा भुगतान इसी एक व्यक्ति के नाम पर दिखाया गया। ग्राम संगठन के माध्यम से जानकारी मांगने पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
गांव के पूर्व सरपंच हरि राम खरे, वर्तमान पंचों और ग्रामीणों ने एकजुट होकर सरपंच मनमोहन वैध के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुल मिलाकर बिना काम किए और फर्जी बिलों के माध्यम से 19 लाख रुपये से अधिक का गबन किया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर कड़ी कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।














