मुंबई। पूंजीगत बाजारों को मजबूत, बॉन्ड मार्केट की पहुंच को बढ़ाने और वित्तीय लागत को कम करने के लिए भारत को बड़े टैक्स सुधार लागू करने होंगे। यह जानकारी रविवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।अपनी रिपोर्ट "इंडियाज रोड टू ए 20 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी" में, इक्विरस सिक्योरिटीज ने ईंधन, निवेश से होने वाली आय, कॉर्पोरेट बॉन्ड और इक्विटी मार्केट में टैक्स को तर्कसंगत बनाने का सुझाव दिया है। उनका तर्क है कि ऐसे उपायों से कैपिटल एलोकेशन में सुधार हो सकता है, अनुपालन का बोझ कम हो सकता है और तेजी से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है।
रिपोर्ट में ईंधन को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के दायरे में लाने की सलाह दी गई है। कहा गया है कि इससे लॉजिस्टिक्स की लागत कम हो सकती है और भारतीय कारोबारों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ सकती है।
इक्विरस के अनुसार, ईंधन पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाने से पूरी इकॉनमी में लगभग 5.5 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि उपलब्ध हो सकती है।
ब्रोकरेज का अनुमान है कि इस कदम से नॉन-सर्विसेज जीडीपी के मुकाबले लॉजिस्टिक्स की लागत लगभग 9 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत हो सकती है और सालाना आर्थिक विकास दर में 0.3-0.4 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हो सकती है।
इसमें लगभग 60 अरब डॉलर के निर्यात फायदे का अनुमान भी लगाया गया है, हालांकि इस कदम से नेट सेंट्रल एक्साइज रेवेन्यू में सालाना लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है।
इक्विरस ने कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट के विकास को बढ़ावा देने के लिए बॉन्ड और इक्विटी पर टैक्स के नियमों को एक जैसा करने की भी वकालत की है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट अभी जीडीपी का लगभग 18 प्रतिशत है, जबकि इक्विटी मार्केट जीडीपी का 130 प्रतिशत है।
रिपोर्ट के अनुसार, अगर बॉन्ड मार्केट का विकास चीन के स्तर तक पहुंच जाए, तो लगभग 54 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त फाइनेंसिंग क्षमता बन सकती है।
उधार लेने की लागत कम होने से उधार लेने वालों को सालाना लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपए की सीधी बचत हो सकती है, जो मल्टीप्लायर असर से पहले जीडीपी का 0.63 प्रतिशत है।
इक्विरस का अनुमान है कि इससे होने वाले आर्थिक मल्टीप्लायर असर से ग्रोथ में 0.9-1.3 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हो सकती है।
ब्रोकरेज ने इन्वेस्टमेंट से होने वाली इनकम पर टीडीएस को घटाकर फ्लैट 5 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव दिया है, और बाकी टैक्स रिटर्न फाइल करते समय चुकाया जा सकता है।
इक्विरस का अनुमान है कि इस कदम से लगभग 13.4 लाख करोड़ रुपए की वर्किंग कैपिटल वापस फाइनेंशियल मार्केट में आ सकती है।




