नई दिल्ली। राज्यसभा ने सोमवार को कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी। इस दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि इस कानून के तहत यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए भुगतान करने वाले उपयोगकर्ताओं पर किसी तरह का कर या लेनदेन शुल्क नहीं लगाया गया है।पिछले सप्ताह लोकसभा से पारित यह विधेयक संक्षिप्त चर्चा और वित्त मंत्री के जवाब के बाद राज्यसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
उच्च सदन में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम की धारा 10ए में प्रस्तावित संशोधन केवल एक सक्षम प्रावधान है और इसमें उपभोक्ताओं पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) का शुल्क लागू नहीं होता है।
सीतारमण ने कहा, “हम जो प्रावधान ला रहे हैं, वह यूपीआई उपयोगकर्ताओं पर कोई कर या लेनदेन शुल्क नहीं लगाता है।”
वित्त मंत्री ने आगे कहा कि संसद की मंजूरी के बाद भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम की यूपीआई और सेवा संचालन समिति इस बात पर विचार करेगी कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट शुल्क लागू किया जाना चाहिए या नहीं।
उन्होंने स्पष्ट किया, “अभी तक मर्चेंट डिस्काउंट रेट की कोई रूपरेखा अंतिम रूप से तय नहीं की गई है।”
यह स्पष्टीकरण उन बढ़ती अटकलों के बीच आया है कि सरकार के प्रस्तावित संशोधनों के बाद यूपीआई भुगतान पर लेनदेन शुल्क लगाया जाएगा।
वित्त मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान जारी कर स्पष्ट किया था कि नए प्रस्ताव के तहत व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले यूपीआई लेनदेन पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहेंगे।
सरकार ने कहा कि अगर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू किया जाता है, तो यह केवल एक निश्चित सीमा से अधिक के सीमित संख्या वाले व्यापारी लेनदेन पर लागू होगा और इसके लिए मामूली दर से शुल्क लिया जाएगा। सरकार ने कहा कि यह दर डेबिट या क्रेडिट कार्ड लेनदेन पर लागू मर्चेंट डिस्काउंट रेट की तुलना में काफी कम होगी।
मंत्रालय ने कहा, “यूपीआई पर व्यापारियों के लिए अधिकांश लेनदेन शुल्क-मुक्त रहेंगे।”
सरकारी अधिकारियों ने कहा कि दूध, सब्जियों और किराने के सामान की दैनिक खरीदारी सहित 90 प्रतिशत से अधिक लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट शुल्क नहीं लगेगा।




