विजयवाड़ा। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार में अधिक निवेश का आह्वान किया। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा को बदलने में उभरती प्रौद्योगिकियों की भूमिका पर भी जोर दिया।

यहां डॉ. एनटीआर यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के रूबी जुबली समारोह को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने जोर दिया कि तकनीक को मानवता की सेवा करनी चाहिए और स्वास्थ्य सेवा के मूल में करुणा होनी चाहिए।

राधाकृष्णन ने डॉक्टरों से नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ लड़ाई में नेतृत्व करने और नशा मुक्त समाज बनाने में मदद करने का भी आग्रह किया।

उपराष्ट्रपति ने सोमवार को आंध्र प्रदेश की दो दिवसीय यात्रा शुरू की। इस यात्रा में तिरुपति के श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर और तिरुचनूर के श्री पद्मावती अम्मावरी मंदिर में प्रार्थना करना शामिल है।

विजयवाड़ा पहुंचने से पहले, उपराष्ट्रपति ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर नागरिकों को बधाई दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, "आदिकवि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण, भारतीय संस्कृति और सभ्यतागत मूल्यों की एक अमूल्य धरोहर है। इसमें निहित सत्य, कर्तव्य, त्याग, करुणा और धर्म के आदर्श आज भी मानवता का मार्गदर्शन करते हैं। उनकी शिक्षाएं हमें हमेशा नैतिक मूल्यों को अपनाने और एक सामंजस्यपूर्ण, संवेदनशील तथा सशक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करती रहेंगी।"

इससे पहले, राधाकृष्णन ने दिल्ली में 'सहयोगात्मक संघवाद और कानून सुधार : राष्ट्रीय और राज्य परिप्रेक्ष्य' विषय पर एक सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने 'विकसित भारत 2047' के लिए भारत के कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

'टीम इंडिया' की भावना पर जोर देते हुए, उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर परामर्श, समन्वय और साझा जिम्मेदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यापक जनहित के कार्यों में राजनीतिक मतभेद कभी भी बाधा नहीं बनने चाहिए।

उन्होंने सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 'टीम इंडिया' की परिकल्पना केंद्र और राज्यों के बीच परामर्श, समन्वय और साझा जिम्मेदारी की मांग करती है। व्यापक जनहित के लिए मिलकर काम करते समय राजनीतिक मतभेद कभी भी आड़े नहीं आने चाहिए।