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मध्य प्रदेशछतरपुरआज शुरु होगा परम्परा, प्रयोग एवं नवाचार का संगम "52वाँ खजुराहो नृत्य समारोह", नृत्य और संवाद का होगा समागम

आज शुरु होगा परम्परा, प्रयोग एवं नवाचार का संगम "52वाँ खजुराहो नृत्य समारोह", नृत्य और संवाद का होगा समागम

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20 फ़रवरी 2026, 07:39 am IST
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छतरपुर/खजुराहो। सन् 1974 में प्रारम्भ हुआ खजुराहो नृत्य समारोह भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों कृ भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मोहिनीअट्टम, कथकली, मणिपुरी इत्यादि के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार का सशक्त मंच रहा है। प्रारम्भिक वर्षों में नृत्य का एक राष्ट्रीय आयोजन के रूप में आरम्भ हुआ, लेकिन संस्कृति विभाग ने प्रतिवर्ष इसमें एक नवीन आयाम जोड़ा, जिसने इसे न सिर्फ नृत्य बल्कि सभी कला विधाओं का सांस्कृतिक समागम बना दिया। यही कारण है कि, समय के साथ इसने अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा अर्जित की। आज यह समारोह विश्व के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में सम्मिलित है, जहाँ देशदृविदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों की उपस्थिति इसे वैश्विक सांस्कृतिक संवाद का केन्द्र बनाती है।


विश्वविख्यात मंदिर की पृष्ठभूमि में आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह इस वर्ष भी भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विविध शैलियों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा। सात दिवसीय इस सांस्कृतिक महोत्सव में देश-विदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। समारोह में भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मणिपुरी और मोहिनीअट्टम जैसी प्रमुख शास्त्रीय शैलियों की प्रस्तुति दी जाएगी।


प्राचीन मंदिरों की भव्यता और प्रकाश सज्जा के बीच कलाकारों की अभिव्यक्ति भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को जीवंत करेगी। हर वर्ष की तरह इस बार भी देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटकों और कला रसिकों के शामिल होंगे। यह समारोह न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य की वैश्विक पहचान को भी सशक्त करता है।


उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी, निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर ने बताया कि उत्सव मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग, उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, नागपुर एवं जिला प्रशासन छतरपुर के सहयोग से 52वाँ खजुराहो नृत्य समारोह 20 से 26 फरवरी 2026 तक मंदिर परिसर, खजुराहो में आयोजित किया जा रहा है।


इस सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आयोजन में देश के सुप्रतिष्ठित एवं उदीयमान नर्तक-नृत्यांगनाएं अपनी साधनारत प्रस्तुतियों से भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विविध परम्पराओं को मंच पर साकार करेंगी। साथ ही इस समारोह को सांस्कृतिक समागम बनाने की दृष्टि से विविध कला विधाओं से सम्बंधित गतिविधियों को आयोजित किया जा रहा है। ताकि यह समारोह विस्तृत और व्यापक बन सके। इस प्रतिष्ठापूर्ण समारोह का शुभारम्भ 20 फरवरी, 2026 को सायं 6ः30 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में होना प्रस्तावित है। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि सांसद खजुराहो वी.डी. शर्मा एवं अध्यक्षता संस्कृति मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी करेंगे।


नटराज थीम: नृत्य, लय और सृजन का प्रतीक

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरन्तर सुदृढ़ हो रही है। मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार इस वर्ष खजुराहो नृत्य समारोह को शास्त्रीय नृत्य की प्रेरणा और आधार नटराज की थीम पर केंद्रित किया गया है। यह थीम भारतीय दर्शन, सृजन और लयबद्ध जीवन दृष्टि का प्रतीक है, जो समारोह को एक गहन आध्यात्मिक आयाम प्रदान करेगा।


भारतीय शास्त्रीय नृत्यों की उत्कर्ष प्रस्तुतियां

उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर ने बताया कि मंदिरों के मध्य निर्मित भव्य मंच पर कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मोहिनीअट्टम, कथकली, मणिपुरी एवं छाऊ जैसी शास्त्रीय नृत्य शैलियों की प्रस्तुतियाँ होंगी। इस वर्ष भी पद्म पुरस्कार प्राप्त, संगीत नाटक अकादमी सम्मानित एवं राष्ट्रीय - राज्य स्तरीय अलंकरणों से विभूषित कलाकारों के साथ उदीयमान प्रतिभाओं को समान मंच प्रदान किया जा रहा है, जिससे नृत्य की गुरु - शिष्य परम्परा और निरंतरता सुदृढ़ हो सके। समारोह में कथक की 6, भरतनाट्यम की 4, ओडिसी की 5, मणिपुरी की 2, कथकली की 1, कुचिपुड़ी की 2, मोहिनीअट्टम की 1, सत्रिया की 1 एवं छाऊ नृत्य की 1 प्रस्तुतियाँ संयोजित की जाएंगी।


20 से 26 फरवरी तक ये नृत्य प्रस्तुतियां होंगी

खजुराहो नृत्य समारोह 2026 की विस्तृत कार्यक्रम सूची यहाँ पॉइंट्स में दी गई है:


20 फरवरी (शुभारंभ):

पद्मश्री ममता शंकर (कोलकाता) – कथक
अनुराधा वेंकटरमन (चेन्नई) – भरतनाट्यम
शुभदा वराडकर (मुंबई) – ओडिसी


21 फरवरी:

विश्वदीप (दिल्ली) – कथक
अक्मादल काईनारोवा (कजाकिस्तान) – भरतनाट्यम
प्रभात मेहतो (झारखंड) – छाऊ


22 फरवरी:

SNA अवॉर्डी थोकचोम इवेमुबि देवी (मणिपुर) – मणिपुरी

पद्मश्री दुर्गाचरण रनवीर (ओडिशा) – ओडिसी

सत्रिया केंद्र समूह (असम) – सत्रिया


23 फरवरी:

नव्या नायर (चेन्नई) – भरतनाट्यम

SNA अवॉर्डी कोट्टक्कल नंदकुमार नायर (केरल) – कथकली

पद्मश्री पद्मजा रेड्डी (हैदराबाद) – कुचिपुड़ी


24 फरवरी:

शिंजनी कुलकर्णी (दिल्ली) – कथक

पद्मश्री इलियाना सिटर (भुवनेश्वर) – ओडिसी

पद्मश्री कलामंडलम क्षमावेती (केरल) – मोहिनीअट्टम


25 फरवरी:

SNA अवॉर्डी शाश्वती सेन (दिल्ली) – कथक

मेहंती (भुवनेश्वर) – ओडिसी

SNA अवॉर्डी नयनसखी देवी (मणिपुर) – मणिपुरी

खुशबू पांचाल (उज्जैन) – कथक समूह


26 फरवरी (समापन):

सुनयना हजारीलाल (मुंबई) – कथक

पद्मश्री प्रतिभा प्रहलाद (बेंगलुरु) – भरतनाट्यम

SNA अवॉर्डी भावना रेड्डी (दिल्ली) – कुचिपुड़ी

प्रभुतोष पाण्डा (भुवनेश्वर) – ओडिसी


राष्ट्रीय बाल नृत्य महोत्सव - 2026

राष्ट्रीय बाल नृत्य महोत्सव, बाल नृत्य कलाकारों के शास्त्रीय नृत्य के संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विगत वर्ष 51वें खजुराहों नृत्य समारोह के अवसर पर मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा राज्य स्तर पर खजुराहो बाल नृत्य महोत्सव का आयोजन किया गया था, जो बहुत सफल रहा एवं प्रासंगिक प्रयास के रूप में सराहा गया। वर्ष 2026 में 52वें खजुराहो नृत्य समारोह के अवसर पर इसकी व्यापकता को बढ़ाते हुये इसे राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया जा रहा है। इस वर्ष राष्ट्रीय बाल नृत्य महोत्सव - 2026 का आयोजन मेला परिसर, खजुराहो में 21 से 26 फरवरी, 2026 तक होगा।


इस महोत्सव में देश के 10 से 16 वर्ष आयु वर्ग के युवा शास्त्रीय नृत्य कलाकारों को सहभागिता के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान किया जा रहा है। यह आयोजन उत्कृष्टता, अनुशासन और सांस्कृतिक गौरव को प्रोत्साहित करते हुए भारत की शास्त्रीय नृत्य परम्परा के भावी ध्वजवाहकों को संवारने और प्रेरित करने का कार्य करेगा। इसमें प्रतिभागिता के लिए विभाग द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर ऑनलाइन प्रविष्टियां आमंत्रित की गई थीं। जिसमें विविध शास्त्रीय नृत्य विधाओं में 310 आवेदन देश भर से प्राप्त हुए हैं। इनमें से प्रस्तुति देने के लिए वरिष्ठ कला गुरुओं द्वारा 31 नृत्य कलाकारों का चयन किया गया है, जिनकी प्रस्तुतियां निम्नानुसार होंगी।


21 फरवरी (सायं 4 बजे से):

सानवी फुंदकर एवं अमोली महेश धमापुरकर (महाराष्ट्र) – सत्रीया

अभिजीता पाण्डा (ओडिशा) – ओडिसी

अनुष्का पात्रा, सोहिनी दास एवं सौमिली पारुई (पश्चिम बंगाल) – कुचीपुड़ी


22 फरवरी:

तपस्या मंदी (पश्चिम बंगाल) – ओडिसी

अनविता पिल्लई (मध्य प्रदेश) – मोहिनीअट्टम

पद्मा रागा मेनन (तमिलनाडु) – कुचीपुड़ी

तनिषा कनाकम (दिल्ली) – कुचीपुड़ी

हर्षिता ओझा (मध्य प्रदेश) – कथक


23 फरवरी:

ह्रदयांशी गुप्ता (मध्य प्रदेश) – ओडिसी

नल्वा प्रमीश (केरल) – मोहिनीअट्टम

अदित्री सिंह (राजस्थान) – कथक

वनिया मित्तल (मध्य प्रदेश) – कथक

काशवी अग्रवाल (उत्तर प्रदेश) – कथक


24 फरवरी:

सौम्या प्रियदर्शिनी (ओडिशा) – ओडिसी

कृपांजली अटोम (मणिपुर) – मणिपुरी

रिद्धी सेन (मध्य प्रदेश) – कथक

तनिष्का हतवलने (मध्य प्रदेश) – भरतनाट्यम

के. तन्वी (तमिलनाडु) – भरतनाट्यम


25 फरवरी:

अशेम लेम्बीसाना चानू (मणिपुर) – मणिपुरी

लिशेम्बी नामराम (मणिपुर) – मणिपुरी

नीतारा नायर (केरल) – भरतनाट्यम

नतानिया सेमुअल (हरियाणा) – भरतनाट्यम

स्वास्तिका जोशी (उत्तराखंड) – भरतनाट्यम


26 फरवरी:

शकिरा सुना (ओडिशा) – ओडिसी

सयनथाना मोहन (गोवा) – ओडिसी

नीलाक्षी चटर्जी (पश्चिम बंगाल) – कथक

सुचाना ठाकुर / मान्या ठाकुर (मध्य प्रदेश) – भरतनाट्यम

रिथिका बी. (पुडुचेरी) – भरतनाट्यम


सांस्कृतिक रैली

खजुराहो नृत्य समारोह में प्रथम बार सांस्कृतिक रैली का आयोजन भी किया जा रहा है। यह नवाचार भारतीय संस्कृति एवं परम्परा के गौरव एवं सौंदर्य को प्रस्तुत करने का प्रयास है। इस रैली में विभिन्न विधाओं एवं परंपराओं के नृत्य कलाकार खजुराहो के विभिन्न मार्गों से होते हुए मुख्य कार्यक्रम स्थल तक पहुंचेंगे। इसका प्रारम्भ समारोह के शुभारंभ अवसर पर 20 फरवरी, 2026 से होगा।


अनुषांगिक गतिविधियां

खजुराहो कार्निवाल: खजुराहो नृत्य समारोह में खजुराहो कार्निवाल पहली बार आयोजित किया जा रहा है। इसे एक जीवंत एवं समावेशी सांस्कृतिक उत्सव के रूप में परिकल्पित किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत के विभिन्न राज्यों की समृद्ध लोक कलाओं, लोक नृत्यों, पारम्परिक शिल्पों एवं सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को प्रदर्शित करना है। शिल्पग्राम, खजुराहो में आयोजित किए जाने वाले इस कार्निवाल के माध्यम से भारत की विविध सांस्कृतिक परम्पराओं को प्रस्तुत करने के लिए एक समर्पित एवं सशक्त मंच प्रदान किया जाएगा। यह कार्निवाल 10 राज्यों की सहभागिता के साथ आयोजित किया जा रहा है। सभी राज्यों के कलाकार एवं कलादलों द्वारा पारम्परिक नृत्य प्रस्तुतियां दी जाएंगी। साथ ही खजुराहो कार्निवाल में शास्त्रीय एवं उप शास्त्रीय नृत्यों की प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जायेगा।


‘नटराज’ प्रदर्शनी में 50 नृत्यरूपों का प्रदर्शन: 52वें खजुराहो नृत्य समारोह की केंद्रीय थीम ‘नटराज’ भारतीय नृत्य, दर्शन और सृजनात्मक चेतना का दिव्य प्रतीक है। इसी भावभूमि को साकार करते हुए नटराज केन्द्रित विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें भगवान शिव के 108 नृत्यरूपों में से 50 नृत्यरूपों के आदमकद शिल्प एवं शैव दृ शाक्त चित्रांकन शामिल हैं। यह प्रदर्शनी नृत्य की आध्यात्मिक ऊर्जा, लय और गतिशीलता का सजीव संवाद है, जिसमें प्रत्येक कृति नटराज के डमरु की नाद - ध्वनि और चरणों की ताल को अनुभूत कराती है। खजुराहो की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में सजी यह प्रदर्शनी नृत्य प्रेमियों को भारतीय नृत्य कला परम्परा की गहराई से जोड़ते हुए समारोह की थीम को एक सशक्त दृश्य आयाम प्रदान करेगी।


लयशाला: नृत्य शैलियों के श्रेष्ठ गुरुओं एवं शिष्यों का संगम: खजुराहो नृत्य समारोह में अनुषांगिक गतिविधियों के क्रम में लयशाला अत्यंत लोकप्रिय एवं सराहनीय गतिविधि है। इस गतिविधि के अंतर्गत भारतीय नृत्य शैलियों यथा कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी, मोहिनीअट्टम, कुचीपुड़ी, कथकली, मणिपुरी एवं छाऊ के श्रेष्ठ गुरुओं के संवाद सत्र का आयोजन समारोह के दौरान 23 से 25 फरवरी, 2026 तक दोपहर 2 से 4 बजे तक किया जा रहा है। इस सत्र में गुरुओं द्वारा नृत्य कला के शिष्यों एवं नृत्यप्रेमियों से संवाद किया जायेगा, साथ ही प्रदर्शन के माध्यम से नृत्य की परम्परा, तकनीकी पक्ष, भाव पक्ष एवं प्रस्तुतिकरण जैसे विषयों पर बात करेंगे। इस वर्ष भी संस्कृति विभाग द्वारा इस सत्र के लिए देश के सुविख्यात नृत्य गुरुओं को आमंत्रित किया जा रहा है।


कलावार्ता: कलाविदों एवं कलाकारों के मध्य संवाद: अनुषांगिक गतिविधियों के अंतर्गत होने वाला कलावार्ता सत्र, जिसमें कलाविद एवं कलाकारों के मध्य संवाद होता है। यह सत्र समारोह के दौरान 21 से 24 फरवरी, 2026 तक प्रातः 11 से दोपहर 1 बजे तक आयोजित किया जायेगा। इस लोकप्रिय सत्र में नृत्य, भारतीय कलाएं, संस्कृतियां एवं परम्परायें, पुरातत्व, खजुराहो के मंदिरों की स्थापत्य कला, देश के पाषाढ़ शिल्पों इत्यादि पर संवाद किया जाता है। इसके लिये विभाग द्वारा विद्वानों, बुद्धिजीवों एवं विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जा रहा है। ताकि अधिक से अधिक लोगों के लिए यह सत्र उपयोगी हो सके।


आर्ट-मार्ट: चित्रकला प्रदर्शनी: खजुराहो नृत्य समारोह के माध्यम से संस्कृति विभाग का यह प्रयास होता है कि नृत्य के अलावा अन्य कला विधाओं के बारे में भी आमजन अवगत हो सकें एवं वर्तमान समय में कलाओं की उत्कृष्टता को समझ सकें। इस उद्देश्य के साथ आर्ट दृ मार्ट चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इसमें जलरंग में प्रकृति चित्रण रू प्रदर्शनी/सह विक्रय हेतु चित्र उपलब्ध होंगे। इसमें देश के ख्यातिलब्ध चित्रकारों की चित्रकला को प्रदर्शित किया जायेगा।


पारम्परिक शिल्प निर्माण तकनीक का प्रदर्शन: मध्यप्रदेश पारम्परिक शिल्प निर्माण के क्षेत्र में अत्याधिक समृद्ध है। प्राचीन काल से प्रदेश के विभिन्न अंचलों में पारम्परिक तकनीकों के माध्यम से शिल्पों का निर्माण किया जाता रहा है। खजुराहो नृत्य समारोह में आयोजित होने वाली सृजन गतिविधि इसी विचार के साथ की जा रही है कि कलाप्रेमियों को शिल्पों के निर्माण सम्बन्धी जानकारी प्राप्त हो सके। इस वर्ष खजुराहो के स्थापत्य आधारित मिट्टी शिल्पों का निर्माण किया जायेगा।


हुनर: पारम्परिक शिल्पों का प्रदर्शन सह विक्रय: मध्यप्रदेश के पारम्परिक शिल्पों का प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य से मेला परिसर में हुनर गतिविधि का आयोजन किया जा रहा है। इस गतिविधि में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से पधारे शिल्पकारों द्वारा हाथ से निर्मित शिल्पों का प्रदर्शन सह विक्रय होगा। इसमें जूट शिल्प, टेराकोटा, मिट्टी शिल्प, पेपर मैशी शिल्प, बट्टो बाई गुड़िया, जरी-जरदोजी, धोकरा शिल्प, आभूषण, झाबुआ गड़िया, गौ शिल्प, कालीन बुनाई, चंदेरी, महेश्वरी, बाग प्रिंट साड़ियां इत्यादि उपलब्ध होंगी।


स्वाद: देशज व्यंजन - नृत्य, कला एवं शिल्प के साथ ही मध्यप्रदेश के पारम्परिक व्यंजनों का स्वाद भी खजुराहो नृत्य समारोह में कलाप्रेमियों को मिल सकेगा। इसके लिए स्वाद गतिविधि का आयोजन किया जा रहा है। स्वाद के अंतर्गत विभिन्न जनजातियों यथा भील, गोंड, कोरकू, कोल, सहरिया, बैगा के पारम्परिक व्यंजन, बुंदेलखण्ड, बघेलखण्ड, निमाड़ एवं मालवा के पारम्परिक व्यंजनों के साथ ही प्रचलित व्यंजनों के स्टॉल लगाये जायेंगे।


मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग की गतिविधियां - खजुराहो पर्यटन के दृष्टिकोण से आकर्षक एवं लोकप्रिय स्थल है। खजुराहो नृत्य समारोह के दौरान मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से विशेष गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। विगत वर्षों में भी पर्यटन गतिविधियों ने पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित किया है। इस वर्ष विशेष रूप से घुमन्तू समुदायों के साथ गाँवों की सैर, एक दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम (कैम्पिंग गतिविधि), नेचर वॉक, खजुराहो विलेज टूर, ई दृ बाइक टूर, वाटर स्पोर्ट्स, हॉट एयर बैलून एवं फैम टूर जैसी रोमांचकारी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।


परम्परा की जड़ों से नवाचार के शिखर तक- भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सुदीर्घ परम्परा और कालातीत सौंदर्य का जीवंत प्रतीक खजुराहो नृत्य समारोह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव है। मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक भूमि खजुराहो में, विश्वविख्यात मंदिरों की पृष्ठभूमि में आयोजित यह समारोह, कला, साधना और सौंदर्य के त्रिवेणी संगम के रूप में स्थापित हो चुका है। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग के अथक प्रयासों से विगत वर्षों में इस समारोह ने अपनी गरिमामयी परम्परा को और अधिक ऊँचाइयों तक पहुँचाते हुए उपलब्धियों, नवाचारों और प्रयोगों के नवीन कीर्तिमान स्थापित किए हैं।



उपलब्धियों और नवाचारों का स्वर्णिम अध्याय

वर्ष 2025 का खजुराहो नृत्य समारोह कई दृष्टियों से ऐतिहासिक सिद्ध हुआ। विगत वर्ष 51वें समारोह में स्थापित 24 घंटे से अधिक समय तक सतत नृत्य प्रस्तुति के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की गूंज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समारोह की पहचान को और सुदृढ़ करती दिखी। इस उपलब्धि ने न केवल खजुराहो को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाया, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य की साधना, अनुशासन और सामर्थ्य को विश्व के समक्ष प्रतिष्ठित किया।


भव्यता और कलात्मक वैभव

खजुराहो के प्राचीन मंदिरों की दिव्य आभा में सजे मंच पर प्रस्तुत नृत्यदृप्रयोग, प्रकाश और ध्वनि की सुसंगत योजना, पारंपरिक और आधुनिक तकनीक का संतुलित प्रयोगकृइन सभी ने समारोह की भव्यता को अनुपम बनाया। कलाकारों की सजीव अभिव्यक्तियाँ, मुद्राओं की शुद्धता और भावदृरस की परिपक्वता प्रस्तुति ने दर्शकों को सौंदर्यबोध की एक उच्च अवस्था तक पहुँचाया।


बाल नृत्य कलाकारों के लिए प्रेरणा, बौद्धिक आंदोलन का स्वरूप

खजुराहो बाल नृत्य महोत्सव के माध्यम से बाल नृत्य कलाकारों को मंच प्रदान कर भावी पीढ़ी को शास्त्रीय नृत्य से जोड़ने का सशक्त प्रयास किया गया। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और नई पीढ़ी को प्रेरणा प्राप्त हुई। ‘प्रणाम’ जैसे संवादात्मक सत्रों में पद्मविभूषण डॉ. पद्मा सुब्रमण्यम सहित कलादृजगत की विभूतियों के विचार, अनुभव और दृष्टि से श्रोताओं को परिचित कराया गया, जिससे यह समारोह एक वैचारिक और बौद्धिक आंदोलन का स्वरूप भी ग्रहण करता दिखाई दिया। शास्त्रीय नृत्य की पारंपरिक प्रस्तुतियों के साथ नवीन विषयदृवस्तु, समकालीन संदर्भ और कथ्यदृप्रयोगों ने इसे युवा पीढ़ी के लिए भी आकर्षक बनाया।


सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में खजुराहो नृत्य समारोह

खजुराहो नृत्य समारोह यह सिद्ध करता है कि यह आयोजन केवल मंचीय प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, दर्शन और जीवनदृमूल्यों का संवाहक है। यहाँ नृत्य साधना है, संवाद है और विरासत को भविष्य से जोड़ने का सेतु भी। इसी कारण यह समारोह आज राष्ट्रीय सीमाओं को लांघकर अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक चेतना का हिस्सा बन चुका है।

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