पन्ना, अमित सिंह। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की रत्नगर्भा धरती ने एक बार फिर एक मेहनतकश परिवार की तकदीर संवार दी है। उत्तर प्रदेश के झांसी से पन्ना आकर बसे एक दंपती की पांच महीने की अनवरत मेहनत उस वक्त रंग लाई, जब उन्हें महज अड़तालिस घंटों के भीतर एक-एक कर चार नायाब हीरे हाथ लगे। पत्नी के सुझाव पर पति ने पन्ना के सरकोहा क्षेत्र में हीरा खदान का पट्टा लेकर दिन-रात पसीना बहाया था। दो दिनों में निकले इन चार हीरों ने पूरे परिवार के संघर्षों को विराम देकर उनके जीवन में नई उम्मीद और खुशियों की चमक बिखेर दी है।


पत्नी ने दिखाई राह, सरकोहा की खदान से निकले 5.16 कैरेट के रत्न

प्राप्त जानकारी के अनुसार, झांसी निवासी राजकुमार श्रीवास की पत्नी गुड्डी देवी पन्ना जिले की रहने वाली हैं। गुड्डी देवी ने ही अपने पति को ससुराल चलकर हीरा खदान में किस्मत आजमाने की सलाह दी थी। पत्नी की बात मानकर राजकुमार पन्ना आ गए और दोनों ने करीब पांच महीने पहले हीरा कार्यालय से सरकोहा स्थित एक निजी भूमि पर विधिवत पट्टा स्वीकृत कराया। इसके बाद पति-पत्नी लगातार खदान की खुदाई और चालन-धुलाई के काम में जुट गए। उनकी अथक मेहनत का सुखद परिणाम तब सामने आया जब खदान से 1.44 कैरेट, 1.62 कैरेट, 1.29 कैरेट और 0.81 कैरेट के चार अलग-अलग हीरे निकले। इन चारों हीरों का कुल वजन 5 कैरेट 16 सेंट दर्ज किया गया है।


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हीरा कार्यालय में जमा कराए गए हीरे, नीलामी से बदलेगी आर्थिक स्थिति

दंपती ने सभी चारों हीरों को पन्ना के संयुक्त कलेक्ट्रेट स्थित हीरा कार्यालय में जमा करा दिया है। हीरा पारखी अनुपम सिंह के अनुसार, जेम्स क्वालिटी और वजन के आधार पर इन हीरों की अनुमानित बाजार कीमत लगभग दो से तीन लाख रुपये आंकी जा रही है। नियमानुसार इन हीरों को जिला प्रशासन द्वारा आयोजित होने वाली आगामी खुली हीरा नीलामी में रखा जाएगा। नीलामी में बिक्री के बाद शासन की 12 प्रतिशत रॉयल्टी और निर्धारित टैक्स काटकर शेष पूरी राशि सीधे खदान संचालक राजकुमार श्रीवास के बैंक खाते में अंतरित कर दी जाएगी।


बच्चों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य का सपना होगा साकार

चार हीरे मिलने के बाद राजकुमार श्रीवास और गुड्डी देवी की खुशी का ठिकाना नहीं है। राजकुमार का कहना है कि उन्होंने पन्ना में हीरे मिलने के किस्से तो बहुत सुने थे, लेकिन यह कभी नहीं सोचा था कि यही रत्नगर्भा माटी उनके परिवार के अंधेरे जीवन को रोशन कर देगी। उन्होंने बताया कि नीलामी से मिलने वाली राशि का उपयोग वे अपने बच्चों की उच्च शिक्षा, परिवार के भरण-पोषण और भविष्य को सुरक्षित करने में करेंगे। दंपती का कहना है कि खदान में मेहनत का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह धरती उन पर और मेहरबान होगी।