कोलकाता। फिल्म निर्देशक राजकुमार संतोषी ने अपने आगामी प्रोजेक्ट 'बंटवारा 1947' को लेकर बातचीत की। उन्होंने फिल्म की कहानी, बंटवारे के दौर की इंसानी भावनाओं और आज की नई पीढ़ी की भूमिका पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि फिल्म का मकसद केवल लोगों को बंटवारे का इतिहास बताना नहीं है, बल्कि उस दौर में इंसान के सामने आई परिस्थितियों और उसके जज्बे को दिखाना है।

इसके अलावा, छात्रों के प्रदर्शन को लेकर संतोषी ने कहा कि देश का भविष्य आज की जेनजी के हाथों में है। इसमें मीडिया और छात्रों की भूमिका बेहद अहम है।

राजकुमार संतोषी ने कहा, ''फिल्म 'बंटवारा 1947' असगर वजाहत के चर्चित नाटक 'जिस लाहौर नई वेख्या, ओ जम्या ए नई' पर आधारित है। फिल्म पूरी तरह नाटक की कॉपी नहीं है। फिल्म में करीब 25 प्रतिशत हिस्सा नाटक से लिया गया है, जबकि बाकी 75 प्रतिशत कहानी को सिनेमा की जरूरत के हिसाब से दोबारा लिखा गया है। कोशिश यह रही कि नाटक की मूल भावना को पूरी तरह बनाए रखा जाए।''

संतोषी ने कहा, ''फिल्म की स्क्रीनप्ले तैयार करने, डायलॉग्स लिखने और कहानी को दोबारा गढ़ने के दौरान असगर वजाहत भी टीम के साथ जुड़े रहे थे। उनकी निगरानी में ही फिल्म को तैयार किया गया है। यह फिल्म मूल रूप से इंसानियत की कहानी है। बंटवारे का दौर ऐसा समय था, जब इंसान के भीतर की अच्छाई और बुराई दोनों सामने आईं। कहीं इंसान बहुत नीचे गिरा तो कहीं उसने मुश्किल हालात में भी इंसानियत को जिंदा रखा। यह फिल्म इसी मानवीय जज्बे को केंद्र में रखती है।''

करियर और फिल्मों को लेकर भी राजकुमार संतोषी ने सोच साझा की। उन्होंने कहा, ''मैंने करियर में 'घायल', 'दामिनी' और 'अजब प्रेम की गजब कहानी' जैसी फिल्में बनाई है। मेरा हमेशा प्रयास रहता है कि फिल्मों को पूरी ईमानदारी से बनाया जाए। फिल्म को दर्शकों से कैसा रिस्पॉन्स मिलेगा, यह बाद की बात है। फिल्मों के चलने में दर्शकों के साथ किस्मत भी अपना काम करती है। मेरी ज्यादातर फिल्मों को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स भी मिला है।''

संतोषी ने आगे बताया, ''इस फिल्म में सनी देओल का किरदार उनकी चर्चित फिल्म 'गदर' के तारा सिंह से बिल्कुल अलग है। जब फिल्म की कहानी तैयार हुई तो हमारी टीम ऐसे प्रोड्यूसर की तलाश में थी, जिसे इस कहानी पर उतना ही भरोसा हो जितना हमें खुद था। इसी दौरान आमिर खान प्रोडक्शंस कहानी से जुड़ा और फिल्म को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ। ये हमारी खुशकिस्मती है कि उन्हें कहानी पसंद आई।''

वहीं, छात्रों के प्रदर्शनों और जेनजी को सलाह देने से जुड़े सवाल पर राजकुमार संतोषी ने कहा, ''मैं खुद को किसी को सलाह देने की स्थिति में नहीं मानता। मेरा मानना है कि जेनजी के हाथों में देश का भविष्य है। आज के युवाओं में गुस्सा, हिम्मत और ताकत है और अगर वे चाहें तो बड़ा बदलाव ला सकते हैं। वह आसमान को भी झुका सकते हैं, तो फिर उनके आगे नेता वगैरह कुछ भी नहीं हैं। मुझे जेनजी पर इतना भरोसा है कि अगर वे किसी वजह से दो कदम पीछे भी हटते हैं तो वे शेर की तरह पीछे हटेंगे और फिर बड़ी छलांग लगाएंगे।''

राजकुमार संतोषी ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ''जेनजी ने साफ कर दिया है कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अगर मीडिया और छात्र मिलकर अपनी जिम्मेदारी निभाएं तो देश के लिए बेहतर और सुनहरा भविष्य तैयार किया जा सकता है।''

फिल्म की बात करें तो यह भारत के विभाजन के दौर की पृष्ठभूमि पर बनी भावुक कहानी है। इसमें सनी देओल के साथ प्रीति जिंटा, शबाना आजमी, अली फजल, अभिमन्यु सिंह और करण देओल अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है। करीब तीन दशक बाद सनी देओल और संतोषी की जोड़ी एक बार फिर साथ आई है। फिल्म में संगीत आर. रहमान ने दिया है और गीत जावेद अख्तर ने लिखे हैं। यह फिल्म 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है।