भोपाल/दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव का सियासी रण अब पूरी तरह से सज चुका है और मुकाबला बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। भाजपा द्वारा पूर्व गृह मंत्री डॉ। नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद, अब कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोलते हुए पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को अपना आधिकारिक प्रत्याशी बना दिया है। भोपाल से लेकर दिल्ली तक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच उनके नाम पर पूर्ण सहमति बनने के बाद कांग्रेस संगठन द्वारा उनके नाम का औपचारिक एलान कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि घनश्याम सिंह दतिया राजघराने के मुखिया हैं और क्षेत्र में उनका अच्छा-खासा राजनैतिक प्रभाव माना जाता है।


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पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर मैंने कर ली है चुनाव की पूरी तैयारी: घनश्याम सिंह

कांग्रेस द्वारा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद पूर्व विधायक घनश्याम सिंह ने मीडिया से चर्चा करते हुए चुनावी रण के लिए अपनी हुंकार भरी है। उन्होंने कहा, "प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की ओर से मेरे पास स्पष्ट निर्देश आ चुके हैं कि मुझे ही पूरी मजबूती के साथ यह चुनाव लड़ना है। पार्टी का आदेश मिलते ही मैंने चुनावी मैदान में उतरने की पूरी तैयारी कर ली है।" घनश्याम सिंह को आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार बनाए जाने के बाद दतिया में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया है और वे पूरी ताकत से चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं।


उपचुनाव में अब दिखेगा सीधा और दिलचस्प मुकाबला

भाजपा द्वारा दतिया के स्थानीय और मजबूत सांगठनिक चेहरे आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारे जाने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस किसी कद्दावर नेता पर ही दांव खेलेगी। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बाद अब कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह और भाजपा के घोषित प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के बीच दतिया की धरती पर सीधा और महामुकाबला देखने को मिलेगा। आशुतोष तिवारी जहां संगठन और प्रशासनिक अनुभव (पूर्व हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष) के दम पर मैदान में हैं, वहीं घनश्याम सिंह अपने राजघराने के रसूख और पूर्व विधायक के रूप में अपने पुराने जनाधार के सहारे भाजपा को कड़ी चुनौती देने के लिए तैयार हैं।


जानिए घनश्याम सिंह के 30 साल के राजनैतिक उतार-चढ़ाव की पूरी कुंडली

इमेज से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, घनश्याम सिंह का 1993 से लेकर 2023 तक का तीन दशकों का राजनैतिक सफर जीत और हार के कई दिलचस्प मोड़ों से होकर गुजरा है:

  • वर्ष 1993 (पहली जीत): घनश्याम सिंह ने अपना पहला विधानसभा चुनाव जीता था। कांग्रेस पार्टी की ओर से लड़ते हुए उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शंभू गोस्वामी को परास्त किया था।
  • वर्ष 1998 (टिकट कटा): इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने घनश्याम सिंह का टिकट काट दिया था और उनकी जगह चंदन सिंह को उम्मीदवार बनाया था, जिसके बाद कांग्रेस को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा था।
  • वर्ष 2003 (दूसरी जीत): कांग्रेस ने एक बार फिर घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया। उन्होंने दमदार वापसी करते हुए राजेंद्र भारती को हराकर विधायक का चुनाव जीता।
  • वर्ष 2008 (त्रिकोणीय मुकाबला): इस चुनाव में घनश्याम सिंह को कांग्रेस से टिकट मिला, जबकि राजेंद्र भारती बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से मैदान में उतरे। इस त्रिकोणीय संघर्ष में भाजपा की ओर से डॉ। नरोत्तम मिश्रा चुनाव जीत गए थे।
  • वर्ष 2013 (सेवढ़ा से पहली हार): कांग्रेस ने उन्हें सेवढ़ा विधानसभा सीट से मैदान में उतारा, जहां बेहद कड़े मुकाबले में वे भाजपा के प्रदीप अग्रवाल से करीब 1800 वोटों के सूक्ष्म अंतर से चुनाव हार गए थे।
  • वर्ष 2018 (सेवढ़ा से वापसी): कांग्रेस ने उन्हें दोबारा सेवढ़ा से प्रत्याशी बनाया। इस बार उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए भाजपा के राधेलाल बघेल को शिकस्त दी और फिर से विधानसभा पहुंचे।
  • वर्ष 2023 (पिछला चुनाव): मुख्य विधानसभा चुनाव 2023 में वे कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे, लेकिन उन्हें भाजपा के प्रदीप अग्रवाल के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा था।