धार, भानु शर्मा। मध्य प्रदेश के धार जिले में श्मशान घाटों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी की एक और तस्वीर सामने आई है। दसई में बारिश के बीच एक मासूम के अंतिम संस्कार के दौरान शेड नहीं होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों को जलती चिता के ऊपर हाथों से तिरपाल तानकर खड़ा रहना पड़ा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय पंचायत और प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं। इससे कुछ दिन पहले बाग क्षेत्र में नदी किनारे अंतिम संस्कार के दौरान अचानक आए तेज बहाव में जलती चिता के साथ शव बह जाने की घटना भी सामने आई थी।
सर्पदंश से हुई थी बालक की मौत
जानकारी के अनुसार शुक्रवार को दसई क्षेत्र में आदिवासी समाज के एक बालक की सर्पदंश से मौत हो गई थी। परिजन और समाज के लोग अंतिम संस्कार के लिए दसई स्थित अनाज मंडी परिसर पहुंचे। इसी दौरान तेज बारिश शुरू हो गई। अंतिम संस्कार स्थल पर पक्का शेड नहीं होने के कारण चिता के भीगने का खतरा पैदा हो गया।
ऐसे में ग्रामीणों ने तिरपाल की व्यवस्था की और उसे हाथों से चिता के ऊपर तानकर बारिश से बचाने का प्रयास किया। बारिश के बीच ग्रामीण काफी देर तक तिरपाल पकड़े खड़े रहे और मासूम का अंतिम संस्कार किया गया। मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने इसका वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।
बाग में नदी के उफान में बह गई थी जलती चिता
धार जिले में मुक्तिधामों की बदहाली का यह पहला मामला नहीं है। 3 जुलाई को बाग क्षेत्र में भी ऐसी ही गंभीर घटना सामने आई थी। बताया गया कि पक्के श्मशान शेड और ऊंचे प्लेटफॉर्म की व्यवस्था नहीं होने के कारण नदी किनारे अंतिम संस्कार किया जा रहा था। इसी दौरान ऊपरी क्षेत्रों में हुई तेज बारिश के बाद नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया।
तेज बहाव चिता तक पहुंचा और जलती चिता के साथ शव नदी में बह गया। इस घटना ने भी क्षेत्र में अंतिम संस्कार स्थलों पर सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं की कमी को उजागर किया था।
श्मशान घाट पर शेड और मूलभूत सुविधाओं की मांग
दसई की घटना के बाद स्थानीय लोगों ने श्मशान घाट पर पक्का शेड, सुरक्षित प्लेटफॉर्म और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। समाज के लोगों का आरोप है कि आदिवासी समाज के लिए अंतिम संस्कार की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में परेशानी और बढ़ जाती है।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्यों की जमीनी स्थिति पर भी सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अंतिम संस्कार जैसी आवश्यक व्यवस्था के लिए सुरक्षित और सुविधायुक्त मुक्तिधाम उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि शोक की घड़ी में परिवारों को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।




