नई दिल्ली। नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना होती है। आयुर्वेद और पारंपरिक मान्यताओं में मां कूष्मांडा का संबंध कूष्मांड यानी पेठे से भी जोड़ा जाता है। पेठा एक ऐसा फल है, जिसका इस्तेमाल खाने के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में भी किया जाता रहा है। इसे अंग्रेजी में ऐश गॉर्ड कहा जाता है।
आयुर्वेद में कूष्मांड को शीतल, पौष्टिक और पित्त को शांत करने वाले गुणों से युक्त माना गया है। आयुर्वेद में इसे 'रसायन' कहा गया है, यानी जो शरीर को नई ऊर्जा दे और उसे जवान बनाए रखे। यह स्वभाव में शीतल होता है, इसलिए शरीर की गर्मी और जलन को शांत करने में उपयोगी हो सकता है।
दिमाग के लिए अमृत : आजकल तनाव, चिंता और भूलने की बीमारी आम हो गई है। पेठा दिमाग के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। यह याददाश्त बढ़ाता है और अल्जाइमर जैसी बीमारियों में भी लाभकारी बताया जाता है। जो लोग ज्यादा टेंशन में रहते हैं, उनके लिए पेठे का जूस बहुत फायदेमंद होता है।
पेट को रखे ठंडा : अगर आपको अक्सर एसिडिटी, पेट में जलन या अल्सर की शिकायत रहती है, तो पेठा आपके लिए वरदान है। यह पेट की अंदर से सफाई करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। इसकी तासीर ठंडी होने की वजह से यह अम्लपित्त यानी एसिडिटी को तुरंत शांत करता है।
किडनी और संबंधी समस्याओं में राहत : पेठा एक नेचुरल डिटॉक्स है। यह किडनी की गंदगी को बाहर निकालता है और पथरी जैसी समस्याओं में भी आराम देता है।
दिल और ब्लड प्रेशर के लिए : यह ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने में मदद करता है और खून से जुड़ी बीमारियों को दूर करता है।
हलांकि, किसी भी गंभीर या लंबे समय से बनी स्वास्थ्य समस्या में सिर्फ पेठे के सहारे न बैठें, बल्कि योग्य डॉक्टर से उपचार कराएं।














