वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि रूस और यूक्रेन ने एक-दूसरे के ऊर्जा ढांचे (एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर) पर हमले नहीं करने पर सहमति जताई है। हालांकि, उन्होंने इस व्यवस्था के लागू होने की तारीख, अवधि या इसकी निगरानी के किसी तंत्र की जानकारी नहीं दी।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "यूक्रेन ने रूसी ऊर्जा ठिकानों पर हमला नहीं करने पर सहमति जताई है और रूस ने भी ऐसा ही करने पर सहमति दी है।" हालांकि, ट्रंप ने यह नहीं बताया कि किन ऊर्जा प्रतिष्ठानों को इस समझौते में शामिल किया गया है, क्या दोनों देशों ने कोई शर्त रखी है और यह सहमति कब से प्रभावी होगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि इस व्यवस्था के पीछे किसने बातचीत कराई या इससे पहले दोनों पक्षों के बीच किस स्तर पर वार्ता हुई।
ट्रंप ने एक अन्य पोस्ट में रूस-यूक्रेन युद्ध को दुनिया में डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह बताया। उन्होंने लिखा, "दुनिया में डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण रूस-यूक्रेन युद्ध है, ईरान नहीं।"
एक अलग पोस्ट में ट्रंप ने अमेरिका में महंगाई के लिए पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनके प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में कीमतों में बढ़ोतरी "स्लीपी जो बाइडेन" प्रशासन की नीतियों का परिणाम थी, न कि उनकी सरकार का।
ट्रंप ने दावा किया कि बाइडेन के कार्यकाल में तेल की कीमतें मौजूदा समय से अधिक थीं और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोक दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान से जुड़ा सैन्य संघर्ष खत्म होते ही तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी।
हालांकि, ट्रंप ने अपने दावों के समर्थन में कोई आंकड़े या समयसीमा पेश नहीं की और न ही ईरान से जुड़े सैन्य संघर्ष पर विस्तार से जानकारी दी।
ट्रंप की घोषणा में व्यापक युद्धविराम का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इसमें केवल ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की बात कही गई है, जबकि अन्य सैन्य कार्रवाइयों के रुकने का संकेत नहीं दिया गया।
रूस और यूक्रेन की सरकारों की ओर से भी ट्रंप के दावे की पुष्टि या प्रतिक्रिया तत्काल सामने नहीं आई है।
गौरतलब है कि फरवरी 2022 में शुरू हुए रूस के पूर्ण पैमाने के आक्रमण के बाद से यूक्रेन के बिजली संयंत्रों, ट्रांसमिशन नेटवर्क और अन्य ऊर्जा ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निगरानी मिशन ने भी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों के कारण बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की पुष्टि की है।




