ग्वालियर। दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीति पर करारा प्रहार करते हुए ग्वालियर के युवा अधिवक्ता उदय शिवहरे ने समाज के सामने एक प्रेरणादायक और सकारात्मक मिसाल पेश की है। विवाह समारोह के दौरान जब तिलक की रस्म में उन्हें 4 लाख रुपये का नगद टीका (दहेज) दिया जा रहा था, तो उन्होंने उसे ससम्मान लौटाते हुए किसी भी प्रकार का दहेज लेने से साफ इनकार कर दिया।
मंडप में लिया ऐतिहासिक फैसला
22 जुलाई को आयोजित इस विवाह समारोह में जब दोनों परिवारों के लोग शादी की रस्मों में व्यस्त थे, तभी युवा वकील उदय ने भरी सभा में खड़े होकर घोषणा की कि वे किसी भी तरह का दहेज स्वीकार नहीं करेंगे। उनके इस अचानक और प्रगतिशील फैसले से मंडप में मौजूद हर व्यक्ति दंग रह गया और उपस्थित अतिथियों ने तालियों के साथ उनके इस कदम का स्वागत किया।
बेटी सम्मान है, कोई बोझ नहीं
अपने इस साहसिक निर्णय पर बात करते हुए अधिवक्ता उदय शिवहरे ने कहा, विवाह दो दिलों और दो परिवारों का पवित्र मिलन है, इसे पैसों के लेन-देन का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। आज भी समाज




