सागर, जीशान खान। जिले की निर्माण परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर अब समय-सीमा तय कर दी गई है। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने विभिन्न निर्माण एजेंसियों की समीक्षा बैठक में लंबित भू-अर्जन प्रकरणों की स्थिति जानी और अधिकारियों को इन्हें निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए। सबसे कम सात दिन की समय-सीमा सागर-मोहाली मार्ग से जुड़े भू-अर्जन और संबंधित कार्यों के लिए तय की गई है, जबकि बंडा ब्लॉक में लंबित भू-अर्जन के सभी मामलों को एक माह में बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में हुई बैठक में एनएचएआई, एमपीआरडीसी, जल संसाधन, सेतु निर्माण समेत विभिन्न विभागों के प्रमुख कार्यों और उनकी प्रगति की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों में भू-अर्जन को लेकर पेंडेंसी नहीं रहनी चाहिए। साथ ही सड़कों के रखरखाव को भी दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। एनएचएआई के सागर-मोहाली मार्ग से संबंधित भू-अर्जन और अन्य कार्यों को लेकर अधिकारियों को सात दिन के अंदर कार्रवाई पूरी करने को कहा गया। सागर लिंक रोड के शेष रेलवे ओवरब्रिज के काम को भी समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। एनएच-44 के ललितपुर-सागर-लखनादौन मार्ग पर सड़क के गड्ढों के सुधार के लिए दो टीमें लगाई गई हैं। बैठक में अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। कलेक्टर ने बारिश के बाद तकनीकी टीम लगाकर सड़क को बेहतर ढंग से सुधारने के निर्देश दिए। बेरखेड़ी से लेहदरा मार्ग को टू-लेन से फोर-लेन में बदलने की प्रक्रिया में थ्री-डी प्रकाशन और जनसुनवाई कर आगे की कार्रवाई करने को कहा गया। वहीं एमपीआरडीसी के सागर-दमोह फोरलेन में सीमा चिन्ह का काम पूरा होते ही आगे की कार्रवाई करने और इसकी प्रतिदिन समीक्षा करने के निर्देश दिए गए। धारा 19 का प्रकाशन अगले सप्ताह तक पूरा करने को कहा गया है। बंडा बांध को लेकर समीक्षा में जल संसाधन विभाग के ईई ने बताया कि बांध का काम 100 प्रतिशत पूरा हो चुका है, जबकि नहर का काम 50 प्रतिशत तक हुआ है। इसके बाद कलेक्टर ने बंडा ब्लॉक में अवॉर्ड और भू-अर्जन की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। पंप हाउस के काम को भी गति देने को कहा गया। बैठक में आपसी सहमति से होने वाले भू-अर्जन के शेष मामलों पर भी कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने कहा कि इन मामलों को शीघ्रता से पूरा कर एक महीने के भीतर सभी लंबित भू-अर्जन केस बंद किए जाएं। राजस्व अधिकारियों के लिए भी समय-सीमा को लेकर निर्देश दिए गए। अनुविभागीय अधिकारियों (राजस्व) को भू-अर्जन के सभी मामलों में समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने और धारा प्रकाशन समय पर कराने को कहा गया। कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि अवॉर्ड पारित होने के बाद एसडीएम तत्परता से संबंधित विभाग को पजेशन दिलाएं। बैठक में अलग-अलग परियोजनाओं की स्थिति के साथ उनकी अगली कार्रवाई की समय-सीमा भी तय हुई। सागर-मोहाली मार्ग के लिए सात दिन, सागर-दमोह फोरलेन में धारा 19 के प्रकाशन के लिए अगले सप्ताह और बंडा के लंबित भू-अर्जन मामलों के लिए एक महीने की समय-सीमा तय की गई है। कलेक्टर ने निर्माण एजेंसियों को भू-अर्जन की पेंडेंसी खत्म करने और सड़कों के मेंटेनेंस पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
छतरपुर। जिले की कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और प्रशासनिक कसावट लाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने विभाग में व्यापक स्तर पर फेरबदल किया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी आदेश के तहत जिले के थानों, चौकियों और पुलिस लाइन में पदस्थ 37 उपनिरीक्षकों (SI), सहायक उपनिरीक्षकों (ASI), प्रधान आरक्षकों (Head Constable) और आरक्षकों (Constable) की नवीन पदस्थापना की गई है। इस सूची में कुछ कर्मियों के पूर्व में जारी तबादला आदेशों को संशोधित भी किया गया है। जारी आदेश के अनुसार प्रशासनिक दृष्टि से उपनिरीक्षक, सहायक उपनिरीक्षक और आरक्षक स्तर के कर्मियों को नवीन जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं: एसपी ने सभी स्थानांतरित कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से अपने नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं।
छतरपुर, आयुष शुक्ला। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का छतरपुर वृत्त इन दिनों अपनी लचर कार्यप्रणाली, मनमानी और भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों को लेकर लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। अब विभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) अमर श्रीवास्तव और स्थानीय अधिकारियों पर शहर में कुकुरमुत्ते की तरह पनप रहीं अवैध कॉलोनियों में नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से बिजली कनेक्शन और लाइनें खींचने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। बिना रेरा (RERA) और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) की वैधानिक स्वीकृतियों के काटी जा रही अवैध कॉलोनियों को कथित मिलीभगत से रोशन करने के इस खेल में लाखों रुपये के वारे-न्यारे होने की चर्चाएं आम हैं। बिना रेरा-टीएनसीपी के काटी जा रही कॉलोनियां, बिजली विभाग बांट रहा कनेक्शन छतरपुर शहर और आसपास के मैदानी इलाकों में भू-माफियाओं और अवैध कॉलोनाइजरों का जाल तेजी से पैर पसार रहा है। मास्टर प्लान और विकास नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए बगैर नगर एवं ग्राम निवेश (TNCP) की अनुमति और बगैर रेरा पंजीयन के कॉलोनियां काटी जा रही हैं। नियमों के अनुसार ऐसी अनाधिकृत कॉलोनियों में तब तक स्थायी अधोसंरचना या बिजली के पोल व ट्रांसफार्मर नहीं लगाए जा सकते, जब तक सक्षम प्राधिकारी की वैधानिक अनुमतियां न हों। आरोप है कि कार्यपालन अभियंता अमर श्रीवास्तव की कथित साठगांठ से कॉलोनाइजरों से सांठगांठ कर और मोटी रकम लेकर धड़ल्ले से बिजली कनेक्शन स्वीकृत किए जा रहे हैं। अधीक्षण अभियंता (SE) एस.बी. सिंह ने नगरपालिका पर फोड़ा ठीकरा, पल्ला झाड़ा अवैध कॉलोनियों में बिजली कनेक्शनों के इस बड़े फर्जीवाड़े को लेकर जब अधीक्षण अभियंता (SE) एस.बी. सिंह से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनका रवैया बेहद टालमटोल भरा रहा। उन्होंने अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ते हुए गेंद नगरपालिका के पाले में डाल दी। उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा, "आप बताएं ऐसी कॉलोनियों के नाम, हम कार्रवाई करेंगे।" जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी का यह बयान न केवल उनके दायित्वों से भागने जैसा नजर आता है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि जिस विभाग के मैदानी अमले को शहर के चप्पे-चप्पे पर बिजली खंभे और लाइन बिछाने की जानकारी होती है, क्या उसे अपने ही क्षेत्र में पनप रहीं अवैध बस्तियों की खबर नहीं है? खंभे चोरी से लेकर आउटसोर्स कर्मी की मौत तक: लगातार विवादों के घेरे में विभाग गौरतलब है कि छतरपुर बिजली विभाग और कार्यपालन अभियंता अमर श्रीवास्तव पर विवादों का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व विभाग के सरकारी बिजली खंभों की कथित हेराफेरी व चोरी का मामला भी जमकर गरमाया था। इसके अलावा सुरक्षा उपकरणों के अभाव में एक आउटसोर्स कर्मचारी की दर्दनाक मौत का मामला भी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। खंभे चोरी, कर्मचारियों की सुरक्षा से खिलवाड़ और अब अवैध कॉलोनियों को गैरकानूनी तरीके से उपकृत करने के आरोपों ने विभाग की साख को पूरी तरह तार-तार कर दिया है। अब देखना होगा कि जनहित से जुड़े इस कथित सिंडिकेट और वित्तीय अनियमितताओं पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी संज्ञान लेकर उच्चस्तरीय जांच बैठाते हैं या फिर विभागीय चुप्पी के बीच यह खेल यूं ही बदस्तूर चलता रहेगा।
छतरपुर। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के छतरपुर कार्यालय में भ्रष्टाचार की जड़ें किस कदर गहरी हो चुकी हैं, इसका जीता-जागता प्रमाण 300 विद्युत खंभों के रहस्यमयी तरीके से गायब होने के मामले ने उजागर कर दिया है। सरकारी खजाने को चूना लगाने के लिए विभाग के भीतर सुनियोजित तरीके से चल रहे इस कथित 'पोल घोटाले' ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप सीधे कार्यपालन यंत्री अमर श्रीवास्तव और उनके करीबी मेंटेनेंस अमले पर लगे हैं, जबकि आला अधिकारी हमेशा की तरह जांच का घिसा-पिटा राग अलापकर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की जुगत में दिख रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार विद्युत अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के नाम पर जारी किए गए 300 नए खंभों का अब तक कोई अता-पता नहीं है। सूत्रों और विपक्षी आरोपों के अनुसार, विभाग में एक बेहद शातिर सिंडिकेट सक्रिय है, जिसके द्वारा सोची-समझी योजना के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से पहले पुराने, जर्जर खंभों को उखाड़ा जाता है और फिर इन्हीं पुराने खंभों पर मामूली मरम्मत और रंग-रोगन कर उन्हें दोबारा नया बताकर खड़ा कर दिया जाता है। और इसी हेरफेर के जरिए करीब 300 नए खंभों की पूरी सरकारी राशि का फर्जी वाउचर और बिलिंग के जरिए बंदरबांट कर लिया गया है। स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि 300 भारी-भरकम सीमेंट और लोहे के खंभे कोई सुई नहीं हैं, जो रात-रात में गायब हो जाएं। बिना विभागीय अफसरों की साठगांठ और संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर सामग्री का हेरफेर नामुमकिन है। इस पूरे मामले को लेकर छतरपुर का राजनैतिक पारा भी गरमा गया है। विपक्ष यानि की कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अनीस खान ने बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सीधे तौर पर कार्यपालन यंत्री अमर श्रीवास्तव और मेंटेनेंस में पदस्थ राजेश खरे को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने ने कड़े शब्दों में कहा कि छतरपुर विद्युत विभाग आकंठ भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है। कार्यपालन यंत्री अमर श्रीवास्तव और मेंटेनेंस प्रभारी राजेश खरे की मिलीभगत से पुराने खंभों को नया दर्शाकर लाखों रुपये की सरकारी राशि डकार ली गई है। भाजपा शासन में अधिकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि ऊपर से लेकर नीचे तक का तंत्र इस लूट में शामिल है। पहले पुराने खंभे उखाड़े जाते हैं, फिर कागजों में उन्हें नया दिखाकर नया बजट हड़प लिया जाता है। अगर इस संगठित लूट पर तत्काल रोक नहीं लगी और दोषियों पर एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी। मजेदार पहलू यह है कि इतने संगीन आरोपों और सैकड़ों खंभों के गायब होने के बावजूद विभाग का शीर्ष नेतृत्व सख्त रुख अपनाने की बजाय रक्षात्मक मुद्रा में है। अधीक्षण अभियंता एसबी सिंह केवल नियमानुसार जांच का औपचारिक बयान देकर पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। एस.बी. सिंह का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी और वे फिलहाल इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। हालांकि, जनता और जागरूक नागरिकों का सवाल है कि जब मुख्य आरोपी कुर्सी पर जमे हुए हैं, तो क्या निष्पक्ष जांच संभव है? क्या जांच के नाम पर केवल समय काटा जा रहा है ताकि सबूतों को नष्ट किया जा सके? छतरपुर की विद्युत व्यवस्था पर भी गौर किया जाए तो जनता बार-बार अघोषित बिजली कटौती, झूलते तारों और खराब ट्रांसफार्मरों से त्रस्त है। ऐसे में विकास और मरम्मत के बजट को अधिकारियों द्वारा निजी तिजोरियों में भरे जाने की खबरों ने आम जनमानस में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। बहरहाल अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जिला प्रशासन और ऊर्जा मंत्रालय इस मामले में हस्तक्षेप कर स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराएंगे और जिम्मेदार कार्यपालन यंत्री समेत पूरे सिंडिकेट पर गबन का मुकदमा दर्ज होगा, या फिर यह घोटाला भी फाइलों की धूल फांकता रह जाएगा।
हरदा। मध्य प्रदेश के हरदा जिले की प्रतिष्ठित 'नार्मदीय ब्राह्मण समाज धर्मशाला' की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर दो दिवसीय भव्य शताब्दी समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष समारोह का उद्देश्य धर्मशाला की नींव रखने वाले संस्थापक समाजसेवियों के अप्रतिम योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करना और समाज की इस ऐतिहासिक विरासत से नई पीढ़ी को अवगत कराना है। नार्मदीय ब्राह्मण समाज मंदिर ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी अशोक पाराशर और वयोवृद्ध मधुकर बिल्लौरे ने धर्मशाला के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया: ब्रिटिश हुकूमत के दौर में वर्ष 1921 में सेठ स्व. गणेशदास बलवटे की आतिथ्य में आयोजित समाज के प्रथम सम्मेलन में धर्मशाला निर्माण का विचार सामने आया था। स्व. गंगाविशन सदाशिव गुहा ने महज ₹400 की राशि में 0.51 डिसमिल भूमि समाज को उपलब्ध कराई थी। समाज की दूरदर्शी पहल के बाद 22 सितंबर 1926 को धर्मशाला की औपचारिक स्थापना की गई, जो आज हरदा जिले की सबसे पुरानी रिकॉर्डेड धर्मशालाओं में शुमार है। शताब्दी समारोह के संयोजक संदीप पाराशर ने बताया कि धर्मशाला के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले 13 संस्थापक सदस्यों को इस दो दिवसीय आयोजन में विशेष रूप से स्मरण व सम्मानित किया जा रहा है। इनमें स्व. रामेश्वरदास गार्गव, स्व. जगन्नाथ गुहा कडोला, स्व. मुंशी दामोदर प्रसाद पाराशर, स्व. ताराचंद दीवान बंडावाला, स्व. सीताराम दीवान पानतलाई, स्व. बाबू नाथुराम बिल्लौरे तजपुरावाले, स्व. लक्ष्मीनारायण निलोबा सराफ, स्व. मुंशी लच्छीराम सवालनवीस, स्व. कुंजीलाल नांदरा, स्व. हरलाल खजांची पानतलाई, स्व. गुलाबचंद बजाज, स्व. रामकरण लाल जोशी नागपुर और स्व. नाथूराम धनेसर खिड़कीवाला शामिल हैं। शताब्दी समारोह के तहत 23 सितंबर को हरदा स्थित गोपीकृष्ण गार्डन में प्रातः पंजीयन के साथ मुख्य कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। कार्यक्रम के दौरान विशेष स्मारिका 'आराध्या - एक अनमोल विरासत' का औपचारिक लोकार्पण किया जाएगा। इसके उपरांत समाज की भावी दिशा तय करने के लिए मंथन एवं संकल्प सत्र आयोजित होंगे, जिसके पश्चात समाज के प्रबुद्ध जनों के सम्मान समारोह के साथ इस दो दिवसीय शताब्दी महोत्सव का समापन होगा।