छतरपुर। जिले में उफनती नदी के बीच जारी केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों का 'चिता आंदोलन' अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। 16वें दिन भी आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जबकि अमित भटनागर का आमरण अनशन 13वें दिन में प्रवेश कर चुका है। प्रधानमंत्री कार्यालय PMO के हस्तक्षेप से आस जगी इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन के रवैये से आंदोलनकारियों के बीच भारी अविश्वास है।
अपनी जान की परवाह किए बिना अमित भटनागर ने सरकार को दो-टूक जवाब दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रशासन के दमनकारी हथकंडे और गिरफ्तारी की धमकियां उनके संकल्प को नहीं डिगा सकतीं। भटनागर ने हुंकार भरते हुए कहा, "मुझे जेल भी भेज दिया जाए, तब भी मेरा आमरण अनशन जेल के भीतर से जारी रहेगा।"
भ्रष्टाचार के खिलाफ अब 'प्रमाणों' का प्रहार
प्रशासन को दी गई 3 दिन की अल्टीमेटम अवधि समाप्त होने के बाद, भटनागर ने एक बड़ा धमाका करने की तैयारी कर ली है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन परियोजनाओं में लगभग "400 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार" हुआ है। भटनागर ने ऐलान किया है कि वे कल से एक-एक करके इन घोटालों को प्रमाणों के साथ सार्वजनिक करना शुरू करेंगे।
आदिवासी महिलाएं बोली पीमओ के हस्तक्षेप से आश, पर प्रशासन पर भरोसा नहीं
आंदोलन स्थल पर मौजूद आदिवासी महिलाओं ने पीएमओ के हस्तक्षेप का स्वागत तो किया, लेकिन स्थानीय प्रशासन पर गहरा अविश्वास जताया। महिलाओं का कहना है कि उन्हें केंद्र से तो उम्मीद है, लेकिन स्थानीय स्तर पर जिस तरह से इस आंदोलन को दबाने की कोशिश की जा रही है, वह प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर दमन दुर्भाग्यपूर्ण
अमित भटनागर ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के दमन को "लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण" करार दिया है। उन्होंने आशंका जताई है कि प्रशासन अपने बड़े पैमाने के भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए हर स्तर पर अत्याचार करने और आंदोलनों को कुचलने पर उतारू है।
क्या प्रशासन भ्रष्टाचार के आरोपों पर चुप्पी तोड़ेगा?
आंदोलन जिस तरह से तीखे तेवर अपना चुका है, उससे यह स्पष्ट है कि आने वाले दिन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौतियां लेकर आएंगे। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार और प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर कोई ठोस कार्रवाई करते हैं या आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेगा।




