चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम, 2012 के तहत मामलों की सुनवाई के लिए 26 अतिरिक्त विशेष न्यायालयों की स्थापना का आदेश दिया है। इससे न्यायिक ढांचा मजबूत होगा और मुकदमों में तेजी आएगी तथा पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देशों के बाद स्वीकृत इन न्यायालयों की स्थापना 46.59 करोड़ रुपए की लागत से की जाएगी।

सरकार ने मादक पदार्थ एवं मनोरोगी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस) के तहत मामलों की सुनवाई के लिए चार नए विशेष न्यायालयों को भी मंजूरी दी है।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, पॉक्सो न्यायालय नेटवर्क के विस्तार का निर्णय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य भर में लंबित मामलों की समीक्षा के बाद लिया गया।

बैठक के दौरान, विजय ने मामलों की स्थिति का जायजा लिया और बाल यौन उत्पीड़न के मामलों की सुनवाई के लिए समर्पित अतिरिक्त न्यायालयों की आवश्यकता का आकलन किया। उन्होंने अधिकारियों को सभी जिलों में पॉक्सो अदालतों की स्थापना के लिए तत्काल कदम उठाने, जांच में तेजी लाने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि दोषी पाए जाने वालों को कानून के अनुसार सजा मिले।

तमिलनाडु में वर्तमान में 22 विशेष पॉक्सो अदालतें कार्यरत हैं, जबकि चार और अदालतें जल्द ही चालू हो जाएंगी।

नवीनतम मंजूरी में 12 नए विशेष न्यायालय और 14 अतिरिक्त विशेष न्यायालय शामिल हैं, जिससे राज्य भर में नियोजित न्यायालयों की संख्या 52 हो गई है। ये न्यायालय राज्य के 47 पुलिस जिलों में सेवाएं देंगे और केवल पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करेंगे।

सरकार ने कहा कि इस विस्तार से लंबित मामलों को निपटाने, त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने और ऐसे अपराधों की रोकथाम के प्रयासों को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

बयान में कहा गया है कि प्रशासन महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से निपटने, अपराधियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने और पीड़ितों को उचित समय सीमा के भीतर न्याय दिलाने के लिए विभिन्न पहल कर रहा है।

इसके अलावा, सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी और सेवन पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अपने 'नशा मुक्त तमिलनाडु' अभियान के तहत चार अतिरिक्त एनडीपीएस न्यायालयों को मंजूरी दी है। कांचीपुरम, तिरुवल्लूर और वेल्लोर में एक-एक विशेष न्यायालय स्थापित किया जाएगा, जबकि चेन्नई में एक अतिरिक्त विशेष न्यायालय स्थापित किया जाएगा।

राज्य में वर्तमान में एनडीपीएस मामलों से निपटने के लिए 11 विशेष अदालतें हैं। सरकार ने कहा कि नए अनुमोदन से लंबित मादक पदार्थों के मामलों के निपटारे और सुनवाई में तेजी लाने की आवश्यकता स्पष्ट होती है। अतिरिक्त अदालतों का उद्देश्य न्यायिक कार्यवाही को मजबूत करना और राज्य के व्यापक मादक पदार्थ विरोधी प्रयासों का समर्थन करना है। बयान में कहा गया है कि ये दोनों निर्णय मिलकर न्याय प्रणाली की बाल यौन शोषण और मादक पदार्थों के मामलों से निपटने की क्षमता को बढ़ाएंगे।