मुंबई। वर्ल्ड मोटरसाइकिल डे के मौके पर अभिनेता कंवर ढिल्लों ने भी अपनी पहली बाइक से जुड़ी यादें शेयर की। इन दिनों टीवी शो 'उड़ने की आशा' में सचिन का किरदार निभा रहे कंवर ने बताया कि कैसे बचपन में शुरू हुआ उनका बाइक लव धीरे-धीरे एक सपने में बदल गया और फिर उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर उस सपने को पूरा किया।कंवर ढिल्लों ने कहा, ''बाइक मेरे जीवन का बेहद खास हिस्सा रही है। बाइक चलाना मुझे सुकून देता है। जब भी मैं हेलमेट पहनकर बाइक पर निकलता हूं तो मुझे एक अलग तरह की शांति महसूस होती है। मेरे लिए बाइक चलाना किसी थेरेपी की तरह है, जो रोजमर्रा की भागदौड़ और तनाव से कुछ समय के लिए राहत देता है।''

उन्होंने कहा, ''बाइक ने मेरी जिंदगी को आसान बनाया है, क्योंकि इससे मेरा काफी समय बचता है और सफर भी ज्यादा आनंददायक होता है।''

अपने बचपन को याद करते हुए कंवर ने कहा, ''मुझे छोटी उम्र से ही टू-व्हीलर का बहुत शौक था। शुरुआत साइकिल से हुई थी, लेकिन जैसे-जैसे बड़ा हुआ, बाइक के प्रति प्यार बढ़ता गया। बाइक चलाने के दौरान जो रोमांच और उत्साह महसूस होता है, वह मुझे हमेशा से पसंद रहा है। मैंने बचपन में ही अपनी बाइक लेने का सपना देख लिया था।''

कंवर ने अपनी पहली बाइक खरीदने की कहानी भी साझा की। उन्होंने बताया, ''मेरी पहली बाइक यामाहा फेजर 150 सीसी थी। उस समय मैं कॉलेज में था और साथ ही एक्टिंग करियर को बढ़ाने की कोशिश में भी था। मुझे रोज कॉलेज से ऑडिशन के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। ऐसे में मैंने अपने पिता से बाइक दिलाने की बात कही। उन्होंने मेरी जरूरत को समझा और बाइक दिला दी, लेकिन इसके साथ एक शर्त भी रखी गई।''

कंवर ने बताया, ''मेरे और मेरे पिता के बीच यह तय हुआ था कि जब मुझे पहली नौकरी मिलेगी, तब वह बाइक के पैसे वापस ले लेंगे। यह शर्त मेरे लिए एक बड़ी जिम्मेदारी की तरह थी। बाद में जब मुझे अपने पहले टीवी शो 'द बडी प्रोजेक्ट' के लिए पैसे मिले, तो मैंने बिना देर किए उस कमाई से अपने पिता का पूरा पैसा लौटा दिया। वह पल मेरे जीवन के सबसे खास पलों में से एक था।''

उन्होंने कहा, ''अपनी मेहनत से कमाए हुए पैसों से पिता का उधार चुकाने के बाद मुझे जो संतोष मिला, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। यह सिर्फ बाइक का मालिक बनने की खुशी नहीं थी, बल्कि अपनी जिम्मेदारी निभाने का एहसास भी था।''

कंवर ने बताया, ''आज मेरे पास दो बाइक हैं। इन बाइक्स को खरीदना मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा था। मैंने इस बारे में अपने परिवार को पहले से कुछ नहीं बताया। जब बाइक की डिलीवरी का समय आया, तो मैं सीधे अपने परिवार को वहां ले गया और उन्हें यह सरप्राइज दिया। परिवार की खुशी देखकर मेरी खुशी और भी बढ़ गई।''

कंवर ने कहा, ''बाइक चलाने का शौक जितना जरूरी है, उससे कहीं ज्यादा जरूरी जिम्मेदारी और सुरक्षा है। मैं कभी बिना हेलमेट के बाइक नहीं चलाता और सभी बाइक राइडर्स से भी यही अपील करता हूं कि हेलमेट पहनकर ही ड्राइव करें।