इंदौर। इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम और बालाघाट में बैगा आदिवासियों से मुलाकात के बाद अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का अगला पड़ाव उज्जैन हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स और दलीय सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी मध्य प्रदेश पर अपना ध्यान लगातार बढ़ा रहे हैं। पिछले 12 दिनों के भीतर दो बार प्रदेश का दौरा करने के बाद अब उनके उज्जैन आगमन की संभावना जताई जा रही है, जिससे राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।


मुख्यमंत्री के गृह जिले में संगठन सृजन और कार्यकर्ताओं से संवाद की रणनीति

राहुल गांधी का प्रस्तावित उज्जैन दौरा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले में होने के कारण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है: सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी अक्टूबर के अंतिम सप्ताह या नवंबर की शुरुआत में उज्जैन आ सकते हैं। वे यहां ब्लॉक व मंडल अध्यक्षों के प्रशिक्षण शिविर में शामिल होंगे और कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। उज्जैन में 'संगठन सृजन अभियान' के तहत नवनियुक्त पदाधिकारियों के साथ-साथ रतलाम, शाजापुर, देवास, आगर मालवा, मंदसौर और नीमच जिलों के जमीनी कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। यदि यह दौरा तय समय पर होता है, तो यह बीते एक महीने के भीतर राहुल गांधी का मध्य प्रदेश में तीसरा दौरा होगा।


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इंदौर और बालाघाट के दौरों से उठ रहे राजनीतिक मुद्दे

राहुल गांधी लगातार राज्य के प्रमुख क्षेत्रीय व सामाजिक मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठा रहे हैं: गुरुवार को बालाघाट के जगला गांव पहुंचे राहुल गांधी ने कुपोषण, मलेरिया और संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले बैगा आदिवासी बच्चों के पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी। उन्होंने स्वास्थ्य व शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इन मुद्दों को लोकसभा में उठाने और कांग्रेस की सरकार आने पर विशेष प्राथमिकता देने का वादा किया। इससे पहले 19 सितंबर को इंदौर में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने बड़ी संख्या में पहुंचे 'जेन-जी' (Gen-Z) छात्रों के साथ शिक्षा प्रणाली और सामाजिक विषयों पर संवाद किया था।


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मध्य प्रदेश का राजनीतिक समीकरण और कांग्रेस का गणित

मध्य प्रदेश में आगामी 2028 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस अभी से अपना जनाधार मजबूत करने में जुटी है: मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से भाजपा के पास 165 और कांग्रेस के पास 64 सीटें हैं। वहीं, राज्य की सभी 29 लोकसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राहुल गांधी का मुख्य फोकस मालवा और महाकौशल अंचलों पर है, जहां कांग्रेस सांगठनिक रूप से खुद को और अधिक मजबूत करना चाहती है। उज्जैन दौरे के जरिए मालवा-निमाड़ अंचल के कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की तैयारी की जा रही है।