झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में बुधवार सुबह 9 बजे से आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। वार्ड बॉय और सफाईकर्मियों के अचानक काम पर न लौटने से अस्पताल की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है और गंभीर मरीजों को वार्डों तक शिफ्ट करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों की इस हड़ताल से मरीजों और तीमारदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, हालांकि अस्पताल प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था करने में जुटा है।


प्रमुख मांगें और नाराजगी की वजह

आउटसोर्सिंग कर्मचारी कई सूत्रीय मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी समस्याओं पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है: कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि उन्हें 'यूपीकॉस' (UPCOS) के तहत समायोजित किया जाए, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। सफाईकर्मियों का कहना है कि उन्हें मात्र 8,000 रुपये मासिक वेतन मिलता है, वह भी समय पर नहीं दिया जाता। वर्तमान में पिछले 3 महीने से वेतन अटका हुआ है। कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले 10 महीनों से उनके वेतन से भविष्य निधि (पीएफ) की कटौती तो की जा रही है, लेकिन उसे खातों में जमा नहीं कराया जा रहा है।


पिछला आश्वासन और पुलिस कार्रवाई पर आक्रोश

कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने इससे पहले गत 3 सितंबर को भी हड़ताल की थी। उस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और जिला प्रशासन (डीएम-एडीएम) ने एक महीने के भीतर सभी मांगें पूरी करने का लिखित आश्वासन दिया था। तय सीमा बीत जाने के बाद भी जब मांगें पूरी नहीं हुईं, तो कर्मचारियों को एक बार फिर हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा। हड़ताल का नेतृत्व कर रहे कर्मचारी अमित को पुलिस द्वारा चिरगांव में घर पर ही 'हाउस अरेस्ट' किए जाने से कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।


कर्मचारियों और प्रशासन का पक्ष

कर्मचारियों का बयान— सफाईकर्मी पवन और वार्ड बॉय प्रदीप ने आरोप लगाया कि प्रशासन शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने भी नहीं दे रहा है। भारी पुलिस बल तैनात कर कर्मचारियों को डराया जा रहा है और पुलिस गाड़ियों में भरकर उठाने की धमकी दे रही है।


अस्पताल प्रशासन का पक्ष— मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. सचिन माहौर ने स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से कुछ असहजता जरूर हुई है। अस्पताल में साफ-सुथरी व्यवस्था बनाए रखने और मरीजों को समय पर शिफ्ट करने के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की मांगें सीधे तौर पर संबंधित आउटसोर्सिंग कंपनी और शासन स्तर से ही पूरी की जा सकती हैं।