मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में मानवता को झकझोर कर रख देने वाले बहुचर्चित 'नीले ड्रम हत्याकांड' में बुधवार को अदालत ने ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायालय ने अपने अहम फैसले में पति सौरभ राजपूत की निर्मम हत्या की दोषी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई है। सजा का ऐलान करते हुए न्यायाधीश ने सख्त टिप्पणी की और स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह एक अत्यंत नृशंस, योजनाबद्ध और क्रूरतम हत्याकांड है, जिसे किसी भी दृष्टिकोण से माफ नहीं किया जा सकता। अदालत के इस कड़े रुख ने समाज में जघन्य अपराधों के खिलाफ एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है।
सजा सुनाए जाने के दौरान जेल में निरुद्ध दोनों दोषियों—मुस्कान और साहिल—को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत की कार्यवाही में पेश किया गया। जैसे ही न्यायाधीश ने फांसी की सजा का फैसला पढ़ा, दोनों दोषी कोर्ट स्क्रीन पर फूट-फूटकर रोने लगे। अदालत ने जब मुस्कान से पूछा कि वह अपने पति की हत्या की दोषी साबित हो चुकी है और इस पर क्या कहना चाहती है, तो उसने रोते हुए केवल इतना कहा, मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए। इसके बाद वह निस्तब्ध हो गई। वहीं, जब यही सवाल उसके प्रेमी और सह-आरोपी साहिल से किया गया, तो वह पूरी तरह खामोश और स्तब्ध खड़ा रहा। फैसला सुनाए जाते ही कोर्टरूम में मौजूद मृतक सौरभ की मां की आंखें नम हो गईं। उन्होंने भर्राए गले से मीडिया से कहा कि आज आखिरकार उनके निर्दोष बेटे की आत्मा को शांति और परिवार को सच्चा न्याय मिल गया है।
यह रूह कंपा देने वाली सनसनीखेज वारदात 3 मार्च 2025 को अंजाम दी गई थी। अवैध संबंधों में बाधा बन रहे पति सौरभ राजपूत को रास्ते से हटाने के लिए मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर खौफनाक साजिश रची और उसकी बेरहमी से हत्या कर दी थी। हैवानियत यहीं नहीं रुकी; साक्ष्यों को मिटाने के लिए दोनों ने आरी से शव के पांच टुकड़े किए और उन्हें एक बड़े नीले प्लास्टिक ड्रम में ठूंसकर ऊपर से सीमेंट और कंक्रीट का घोल डाल दिया था, ताकि शव से बदबू न फैले और किसी को भनक न लग सके। पुलिस की त्वरित और गहन विवेचना के चलते इस अंधे कत्ल का पर्दाफाश हुआ था। अदालत में पेश किए गए पुख्ता वैज्ञानिक व फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाकर इस नृशंस कांड का अंतिम न्याय तय किया।














