तोयोहाशी। भारत का एक और एशियन गेम्स ताइक्वांडो अभियान बिना किसी पदक के समाप्त हो गया। देश की तीन सदस्यीय महिला टीम आइची-नागोया 2026 से खाली हाथ लौटी। यह प्रतियोगिता शनिवार को जापान के तोयोहाशी जिमनैजियम में खत्म हो जाएगी।
कशिश मलिक, ज्योति यादव और रूपा बेयोर चार मेडल इवेंट्स में भारत की तरफ से उतरी थीं, लेकिन किसी भी इवेंट में इनमें से कोई भी एथलीट पोडियम फिनिश नहीं कर सकी। भारत का आखिरी एशियन गेम्स ताइक्वांडो मेडल 2002 में बुसान में सुरेंद्र भंडारी ने जीता था। सुरेंद्र ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था।
कशिश ने गेम्स में भारत को सबसे ज्यादा जीत दिलाई और मिक्स्ड इंडिविजुअल वर्चुअल ताइक्वांडो इवेंट के क्वार्टर फाइनल में पहुंची, जो आइची-नागोया में एशियन गेम्स में डेब्यू कर रहा था।
उन्होंने हांगकांग, चीन की सियू वाई लैम पर 2-0 की जीत के साथ शुरुआत की और दोनों राउंड 800-500 और 400-0 से जीते। उनका कैंपेन क्वार्टर फाइनल में कजाकिस्तान की रीता बाकिशेवा के खिलाफ खत्म हुआ, जिन्होंने आखिर में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
कशिश के पहले राउंड में 320-0 की बढ़त लेने के बाद उन्होंने पहला राउंड 320-0 से जीता, लेकिन कजाख खिलाड़ी ने अगले दो राउंड 460-0 और 340-0 से जीतकर 2-1 से जीत पक्की कर ली।
भारतीय खिलाड़ी ने पहले महिलाओं के -57 किग्रा कॉम्पिटिशन में भी हिस्सा लिया था, जहां उनका सामना ड्रॉ में सबसे मजबूत नामों में से एक से हुआ था। पेरिस 2024 की ओलंपिक चैंपियन, कोरिया गणराज्य की किम यू-जिन ने कशिश को 2-0 (18-3, 17-2) से हराया।
ज्योति का कैंपेन महिलाओं की प्रतियोगिता में राउंड ऑफ 16 चरण पर खत्म हुआ। उन्हें थाईलैंड की कन्नालक चुएनचुकलिन ने 2-0 से हराया, जिन्होंने 15-4 और 14-2 से जीत हासिल की।
बेयोर की चुनौती महिलाओं के इंडिविजुअल इवेंट में आई। वह अपने आठ एथलीटों वाले सेमीफाइनल ग्रुप में 7.6100 के स्कोर के साथ पांचवें स्थान पर रहीं, जिससे वह मेडल राउंड में आगे बढ़ने के लिए जरूरी टॉप चार पोजीशन से बाहर हो गईं।
वियतनाम की न्गोक तुयेत सांग चाऊ ने 7.9500 के साथ ग्रुप से फाइनल क्वालीफाइंग स्पॉट हासिल किया।
ताइक्वांडो ने सियोल 1986 के बाद से हर एशियन गेम्स में हिस्सा लिया है, बीजिंग में 1990 के एडिशन को छोड़कर। फिर भी भारत उस दौरान इस डिसिप्लिन में सिर्फ एक मेडल जीत पाया है, जिसमें बुसान में भंडारी का ब्रॉन्ज मेडल देश का अकेला पोडियम फिनिश रहा।
भारतीय ताइक्वांडो को एशियन गेम्स में पदक के लिए अब कम-से-कम चार साल और इंतजार करना होगा।














