गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को कांग्रेस पर 'राजनीतिक अराजकता' के जरिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता संसद में बहस करने के बजाय सड़कों पर उतर रहे हैं, जिसका मकसद 'लोकतंत्र को धूमिल करना' है।मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि धेमाजी के लोगों ने भारतीय जनता पार्टी के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान का 'खुले दिल' से स्वागत किया है।
उन्होंने कहा कि हजारों लोगों की भागीदारी यह दिखाती है कि जनता भाजपा के उस रुख का समर्थन करती है, जिसके अनुसार असम की शांति और सद्भाव से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, भले ही कांग्रेस इसे 'राजनीतिक अराजकता और झूठे नैरेटिव' के रूप में पेश करे।
मुख्यमंत्री सरमा ने 'एक्स' पोस्ट में कहा, "वे संसद में बहस करने से डरते हैं, लेकिन लोकतंत्र को धूमिल करने का ठेका लेकर घूम रहे हैं।"
उनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब चुनावी अनियमितताओं और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव चल रहा है।
कांग्रेस और 'इंडिया' ब्लॉक के अन्य दलों ने चुनाव आयोग पर 'वोट चोरी' में मदद करने का आरोप लगाया है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।
1 नवंबर को राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेताओं ने दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' बैनर तले एक रैली में हिस्सा लिया।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण से पात्र नागरिक अपने वोट देने के अधिकार से वंचित हो सकते हैं, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है।
विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों के जवाब में भाजपा ने अपना 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान शुरू किया है।
मुख्यमंत्री सरमा ने बुधवार को बिहार में भी इसी तरह के एक मार्च में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने 'वोट चोरी' के बार-बार लगाए जा रहे आरोपों को लेकर राहुल गांधी की आलोचना की।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी गुरुवार को राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि उन्होंने कांग्रेस की संस्कृति में व्यवधान डालना और बहिष्कार करना शामिल कर लिया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को चुनौती दी कि वे संसद के भीतर मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) पर चर्चा करें।
इस विवाद ने पूरे देश में सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच राजनीतिक लड़ाई को और तेज कर दिया है।













