गुवाहाटी। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने रविवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की विविधता, सांस्कृतिक समृद्धि और सामूहिक प्रयास 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
राज्यपाल गुवाहाटी के श्रीमंत शंकरदेव अंतर्राष्ट्रीय सभागार में लोक भवन असम द्वारा आयोजित आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, चंडीगढ़ और पुडुचेरी के राज्य स्थापना दिवस समारोह में बोल रहे थे।
सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल आचार्य ने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशिष्ट ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और परंपराएं हैं, लेकिन सभी एक समान राष्ट्रीय भावना से एकजुट हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में निहित है, और प्रत्येक राज्य देश के समग्र विकास और प्रगति में समान रूप से महत्वपूर्ण योगदान देता है।
कृषि, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, कला, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं में उनकी उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने कहा कि राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान, पारस्परिक सहयोग और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सहकारी संघवाद को और मजबूत करेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के '2047 तक विकसित भारत' के विजन का जिक्र करते हुए राज्यपाल आचार्य ने कहा कि राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर राज्य और नागरिक की सामूहिक प्रतिबद्धता और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता होगी।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास समावेशी होना चाहिए, यह सुनिश्चित करते हुए कि इसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, नवाचार, कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण में निरंतर निवेश और प्रयासों के महत्व को भी रेखांकित किया।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि राष्ट्र निर्माण एक साझा जिम्मेदारी है और नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपनी-अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करते हुए विकास पहलों में सक्रिय रूप से योगदान दें।
उन्होंने कहा कि अन्य समुदायों की परंपराओं और उपलब्धियों का सम्मान करने से सांस्कृतिक समझ मजबूत होगी और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को बल मिलेगा।
इस समारोह में भाग लेने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के रंगारंग सांस्कृतिक प्रदर्शनों का आयोजन किया गया, जिसमें उनकी लोक परंपराओं, कला रूपों और विशिष्ट सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को प्रदर्शित किया गया।

















