मॉस्‍को, 1 नवंबर । रूसी गैस को लेकर यूरोप का गैर-जिम्मेदाराना रवैया ही यूरोप में हो रहे दंगों की मूल वजह है। यह दावा रूस के राष्ट्रपति के विशेष दूत और 'रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) के सीईओ किरिल दिमित्रिएव ने क‍िया।

रूसी समाचार एजेंसी तास की र‍िपोर्ट के अनुसार, रूस के राष्ट्रपति के विशेष दूत (जो विदेशी देशों के साथ निवेश और आर्थिक सहयोग के मामलों को देखते हैं) और आरडीआईएफ के सीईओ किरिल दिमित्रिएव ने कहा कि यूरोप में हो रहे दंगों की जड़ यूरोप द्वारा रूसी गैस को छोड़ने का गैर-जिम्मेदाराना फैसला है, जिसके कारण ऊर्जा की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है।

उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "जैसा कि पहले अनुमान लगाया गया था, रूसी गैस से दूरी बनाने के कारण यूरोपीय संघ में ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों का नतीजा उद्योगों के कमजोर होने, दंगों और लूटपाट के रूप में सामने आ रहा है। इस स्थिति को आत्मघाती प्रवासन नीतियों और अपनी गलती सुधारने से यूरोपीय संघ के अधिकारियों के लगातार इनकार ने और भी बढ़ावा दिया है।"

र‍िपोर्ट के अनुसार, दिमित्रिएव ने अपनी पोस्ट के साथ बीबीसी की एक खबर भी साझा की, जिसमें कहा गया था कि जर्मनी में बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन अब दंगों का रूप लेते जा रहे हैं।

लगातार तीसरे वीकेंड फ्रांस की सड़कों पर महंगाई, आर्थिक असमानता और सरकारी नीतियों के खिलाफ हजारों लोग सड़क पर उतरे। ज्यादातर जगहों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन शनिवार को जैसे ही रैलियां खत्म होने लगीं, पेरिस समेत कई शहरों में नकाब पहने लोगों के समूह पुलिस से भिड़ गए।

फ्रांस में ऐसे उपद्रवियों के लिए एक खास शब्द इस्तेमाल होता है 'कैसर्स'। फ्रांसीसी भाषा में इसका अर्थ है 'तड़फोड़ करने वाले'। ये कोई एक पंजीकृत संगठन या औपचारिक राजनीतिक दल नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग छोटे समूहों में सक्रिय ऐसे लोग हैं, जो प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस के साथ संघर्ष में शामिल होते हैं।

वहीं जर्मनी में भी यूरोप के अन्य हिस्सों में हुए विरोध प्रदर्शनों से प्रेरित होकर, युवाओं के नेतृत्व वाला आंदोलन बेहतर शिक्षा और रहने-सहने के खर्च को कम करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरा हुआ है।