छतरपुर। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ राजीव सिंह kvk nowgong जिला छतरपुर द्वारा खरीफ मौसम में सोयाबीन फसल में पीला मोजेक वायरस (Yellow Mosaic Virus–YMV) के प्रकोप की स्थिति में किसानों को प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान कर तत्काल समेकित प्रबंधन अपनाना चाहिए। यह रोग मुख्यतः सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) जैसे वाहक कीटों के माध्यम से फैलता है। अतः रोगग्रस्त पौधों को समय पर हटाने के साथ-साथ सफेद मक्खी का प्रबंधन रोग के प्रसार को रोकने में महत्वपूर्ण है। KVK की सोयाबीन सलाह में भी प्रारंभिक अवस्था में संक्रमित पौधों को उखाड़कर नष्ट करने, पीले स्टिकी ट्रैप लगाने तथा सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए अनुशंसित पूर्व-मिश्रित कीटनाशकों के उपयोग की सलाह दी गई है।
रोग की प्रारंभिक अवस्था में सोयाबीन की नई एवं ऊपरी पत्तियों पर पीले-हरे रंग के अनियमित चितकबरे धब्बे दिखाई देते हैं। संक्रमण बढ़ने पर पत्तियों का पीलापन एवं मोजेक लक्षण स्पष्ट हो जाते हैं तथा पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। अधिक प्रकोप की स्थिति में फलियों एवं दानों की संख्या तथा उपज में कमी होने की संभावना रहती है।
इसलिए किसानों को सबसे पहले खेत का नियमित निरीक्षण करना चाहिए और विशेष रूप से नई पत्तियों पर पीले-हरे चितकबरे लक्षण तथा पत्तियों की निचली सतह पर सफेद मक्खी की उपस्थिति की जांच करनी चाहिए। जैसे ही रोगग्रस्त पौधों की पहचान हो, उन्हें जड़ सहित उखाड़कर खेत से बाहर निकालकर नष्ट कर देना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में संक्रमित पौधों को हटाना रोग के संक्रमण स्रोत को कम करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इसके बाद सफेद मक्खी की निगरानी एवं रोकथाम के लिए खेत में विभिन्न स्थानों पर पीले चिपचिपे ट्रैप (Yellow Sticky Traps) लगाए जाएं। ये ट्रैप सफेद मक्खी की निगरानी तथा उसकी संख्या को कम करने में सहायक होते हैं। साथ ही खेत एवं आसपास के क्षेत्र को खरपतवार मुक्त रखना चाहिए, क्योंकि कुछ वैकल्पिक पौधे वायरस एवं उसके वाहक कीट के लिए स्रोत का कार्य कर सकते हैं।
यदि सफेद मक्खी की संख्या बढ़ती है, तो सोयाबीन में पंजीकृत एवं अनुशंसित कीटनाशकों का ही प्रयोग करें। KVK की सोयाबीन सलाह के अनुसार थायमेथोक्साम 12.6% + लैम्ब्डा-सायहेलोथ्रिन 9.5% ZC @ 125 मिलीलीटर/हेक्टेयर अथवा बीटासायफ्लुथ्रिन 8.49% + इमिडाक्लोप्रिड 19.81% OD @ 350 मिलीलीटर/हेक्टेयर जैसे पूर्व-मिश्रित उत्पादों का उपयोग किया जा सकता है।
किसानों को ध्यान रखना चाहिए कि एक ही रासायनिक समूह के कीटनाशक का बार-बार प्रयोग न करें, बल्कि उपलब्ध अनुशंसाओं के अनुसार कीटनाशक समूहों का विवेकपूर्ण उपयोग करें, ताकि सफेद मक्खी में कीटनाशक प्रतिरोध विकसित होने की संभावना को कम किया जा सके। रोगग्रस्त पौधों को हटाना, सफेद मक्खी की निगरानी, पीले स्टिकी ट्रैप का उपयोग, खेत की स्वच्छता एवं आवश्यकता के अनुसार अनुशंसित कीटनाशक का प्रयोग—इन सभी उपायों को एक साथ अपनाना पीला मोजेक वायरस के समेकित प्रबंधन की प्रभावी रणनीति है।
किसानों के लिए सरल प्रबंधन क्रम
नियमित निगरानी → रोगग्रस्त पौधों की पहचान → संक्रमित पौधों को जड़ सहित उखाड़कर नष्ट करना → सफेद मक्खी की निगरानी → पीले स्टिकी ट्रैप लगाना → खरपतवार एवं वैकल्पिक मेजबानों का नियंत्रण → सफेद मक्खी की संख्या बढ़ने पर अनुशंसित कीटनाशक का प्रयोग।




