पन्ना। पूर्व मंत्री एवं पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा है कि पन्ना स्थित श्री श्री 1008 श्री जुगल किशोर सरकार धाम की दिव्यता और महिमा आज भी देश के अधिकांश श्रद्धालुओं तक नहीं पहुंच सकी है। उन्होंने कहा कि इसका कारण श्रद्धा का अभाव नहीं, बल्कि धाम के बारे में पर्याप्त जानकारी का न होना है। उनका उद्देश्य इस प्राचीन और दिव्य धाम को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना है।
बृजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि बहुत कम लोग जानते हैं कि पन्ना में भगवान श्रीकृष्ण की स्वयं प्रकट सप्त निधियों में से एक दिव्य स्वरूप श्री जुगल किशोर सरकार विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि जिस धाम की महिमा पूरे सनातन समाज तक पहुंचनी चाहिए थी, वह अब तक सीमित दायरे में ही रह गई है। उन्होंने कहा कि आज वृंदावन के श्री राधारमण मंदिर, श्री बांके बिहारी मंदिर और जयपुर के श्री गोविंद देव जी मंदिर में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसका कारण संतों, आचार्यों और कथावाचकों द्वारा वर्षों से इन धामों की महिमा का व्यापक प्रचार-प्रसार है। उन्होंने कहा कि अब यही प्रयास पन्ना के श्री जुगल किशोर सरकार धाम के लिए भी किया जाएगा।
पूर्व मंत्री ने कहा कि सनातन परंपरा में संत समाज केवल धर्मोपदेशक नहीं, बल्कि समाज के आध्यात्मिक पथप्रदर्शक होते हैं। उन्होंने बताया कि परम पूज्य स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य जी महाराज के बारे में पूज्य प्रेमानंद जी महाराज ने उन्हें "सनातन धर्म की धर्मध्वजा की संज्ञा दी है। ऐसे संत जब श्री जुगल किशोर सरकार धाम की महिमा का वर्णन करेंगे तो यह संदेश देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं तक स्वतः पहुंचेगा। बृजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा, श्रीभक्तमाल कथा और गुरु पूर्णिमा महोत्सव के आयोजन से पन्ना की आध्यात्मिक पहचान को नई ऊंचाइयां मिल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि इसका सकारात्मक प्रभाव अभी से दिखाई दे रहा है और मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु प्रतिदिन श्री जुगल किशोर सरकार धाम पहुंच रहे हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में जिस प्रकार श्रद्धालु वृंदावन, द्वारका, जयपुर और नाथद्वारा की यात्रा को सौभाग्य मानते हैं, उसी प्रकार पन्ना का श्री जुगल किशोर सरकार धाम भी सनातन आस्था के प्रमुख तीर्थस्थलों में अपना विशिष्ट स्थान बनाएगा। उन्होंने कहा कि इस महाआयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक प्रचार नहीं, बल्कि पन्ना की आध्यात्मिक विरासत को विश्व पटल पर स्थापित करना तथा धार्मिक पर्यटन के माध्यम से क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास को नई दिशा देना भी है।




