जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घोषणा की कि उनकी सरकार ने भाजपा के चुनावी घोषणा-पत्र में किए गए लगभग 78 प्रतिशत वादों को पूरा कर लिया है, और बाकी वादों को पूरा करने की दिशा में भी तेजी से काम चल रहा है।मुख्यमंत्री ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास, जनसेवा और सुशासन पर अपनी सरकार के फोकस को दोहराया।
संसाधन सुरक्षा में हुई महत्वपूर्ण प्रगति का जिक्र करते हुए, शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राजस्थान जल और ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
राज्य ने चार बड़े अंतर-राज्यीय जल समझौते किए हैं—जिनमें रामजल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल समझौता, और किशाऊ व नर्मदा परियोजनाएं शामिल हैं। इनका उद्देश्य पीने के पानी, कृषि और उद्योगों के लिए पानी की जरूरतों को सुरक्षित करना है। 'वंदे गंगा' जैसे संरक्षण अभियानों ने भी भूजल स्तर को बढ़ाने में योगदान दिया है।
ऊर्जा क्षेत्र में, राज्य अब बिजली आयात करने वाले राज्य से बदलकर बिजली के मामले में अधिशेष (सरप्लस) वाला राज्य बन गया है। 51.6 गीगावाट की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के साथ, यह देश में सबसे आगे है।
वर्तमान में 27 जिलों के किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, पीक डिमांड (अधिकतम मांग) को कुशलतापूर्वक प्रबंधित करने के लिए 6,000 मेगावाट-ऑवर क्षमता वाली बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं।
रोजगार के लक्ष्यों पर बात करते हुए, शर्मा ने 4 लाख सरकारी नौकरियां देने और निजी क्षेत्र में 6 लाख अवसर पैदा करने के लिए एक विस्तृत रोडमैप पेश किया।
सार्वजनिक क्षेत्र में 1.93 लाख से अधिक नियुक्तियां पहले ही पूरी हो चुकी हैं, जबकि 1.18 लाख पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा, निजी क्षेत्र में लगभग 5 लाख रोजगार के अवसर पैदा किए गए हैं और 3 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण (स्किल ट्रेनिंग) दिया गया है।
भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर जोर देते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के समय से चली आ रही प्रशासनिक गड़बड़ियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए हैं, खासकर पेपर लीक और भ्रष्टाचार के मामलों में।
अब तक 381 अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है, और लगभग 700 अन्य लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है।
इसके अलावा, आर्थिक विकास को गति देने के लिए राज्य ने 'राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट' का आयोजन किया। इसमें 35 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें से 9 लाख करोड़ रुपए की परियोजनाएं अब जमीन पर उतरने (कार्यान्वयन) की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
















