बीजिंग। मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र संधि के पक्षकारों का 17वां सम्मेलन (कॉप-17) सोमवार को मंगोलिया की राजधानी उलानबातर में उद्घाटित हुआ।

दो सप्ताह तक चलने वाले इस सम्मेलन का विषय है, "भूमि का पुनर्स्थापन, आशा की नई किरण"। इसमें भूमि क्षरण के पुनर्स्थापन, सतत भूमि प्रबंधन, सूखा प्रतिरोधक क्षमता निर्माण और घास के मैदानों के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन जैसे विषयों पर परामर्श और विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा।

इस संधि के सचिवालय की कार्यकारी सचिव यास्मीन फौद ने कहा कि भूमि क्षरण और सूखा अब दूर की पर्यावरणीय समस्याएं नहीं रह गई हैं। स्वस्थ भूमि एक स्वस्थ खाद्य प्रणाली, एक लचीली अर्थव्यवस्था और एक स्थिर समाज की नींव है; इसलिए, कॉप-17 को इसके कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। ऐसे समय में जब बहुपक्षवाद चुनौतियों का सामना कर रहा है, कॉप-17 दुनिया को यह प्रदर्शित करने का अवसर भी प्रदान करता है कि लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए व्यावहारिक समाधान प्रदान करने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं।

चीन सरकार का प्रतिनिधिमंडल वित्त पोषण, सूखा राहत और घास के मैदानों पर उच्च स्तरीय संवाद में भाग लेगा। चीन ने अंतर्राष्ट्रीय घास के मैदान दिवस की स्थापना का प्रस्ताव रखा है, जो अंतर्राष्ट्रीय घास के मैदान और चरवाहा वर्ष के परिणामों के दीर्घकालिक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण घटक होगा। इससे घास के मैदानों के संरक्षण और पुनर्स्थापन में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को और बढ़ावा मिलेगा और संयुक्त राष्ट्र के 2030 सतत विकास एजेंडा के कार्यान्वयन में सकारात्मक योगदान मिलेगा।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)