इटली। यूरोपीय देश इटली के पोरदेनोने शहर में आयोजित विश्वस्तरीय फर्नीचर एवं इंटीरियर डिजाइन प्रदर्शनी में व्यापार और भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। इस अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में भारत समेत दुनिया भर के प्रतिष्ठित उद्योगपतियों, उद्यमियों और इंटीरियर डिजाइनरों ने शिरकत की। आधुनिक डिजाइन, नवीनतम तकनीक और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के इस वैश्विक मंच पर भारतीय प्रतिनिधियों ने विजयादशमी का पर्व भी अत्यंत उत्साह और उल्लास के साथ 'दशहरा मिलन समारोह' के रूप में मनाया।

पोरदेनोने में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में विश्वस्तरीय आधुनिक फर्नीचर, उन्नत इंटीरियर सज्जा, अत्याधुनिक विनिर्माण तकनीक और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाले (इको-फ्रेंडली) उत्पादों का भव्य प्रदर्शन किया गया। वैश्विक बाजार की मांग और भविष्य के इंटीरियर रुझानों को समझने के लिए विभिन्न देशों के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों ने यहां के स्टॉलों का सघन अवलोकन किया और नए तकनीकी नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की।

इस प्रतिष्ठित आयोजन में 'दद्दा जी इंटरनेशनल कल्चर सेंटर' के प्रमुख पंडित सुधीर शर्मा ने 'कुरुकुमा रेस्टोरेंट' के संचालक आसिफ खान के साथ विशेष रूप से सहभागिता की। उन्होंने प्रदर्शनी के विभिन्न सेक्टरों का मुआयना किया और भारत तथा अन्य यूरोपीय देशों से आए प्रमुख उद्योगपतियों व निर्यातकों से व्यापारिक सहयोग, निर्यात संभावनाओं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को लेकर सार्थक संवाद किया।


हॉलैंड और राजस्थान के उद्यमियों की मौजूदगी में मना दशहरा मिलन

प्रदर्शनी के दौरान भारतीय समुदाय और प्रवासी उद्यमियों द्वारा एक विशेष दशहरा मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में हॉलैंड निवासी अमरीश डागा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके साथ ही राजस्थान के जयपुर और जोधपुर के कई प्रतिष्ठित व्यवसायियों व निर्यातकों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। सभी ने एक-दूसरे को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं और विदेशी धरती पर भारतीय परंपराओं, एकता और आपसी भाईचारे का संदेश प्रसारित किया।


पंडित सुधीर शर्मा बोले- वैश्विक मंचों पर मजबूत हो रही भारतीय पहचान

आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पंडित सुधीर शर्मा ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म केवल व्यापार और उद्योग तक सीमित नहीं रहते, बल्कि यह विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक सेतु का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि सुदूर देशों में भारतीय त्योहारों का इस प्रकार आयोजन न केवल प्रवासी भारतीयों को अपनी जड़ों से जोड़े रखता है, बल्कि वैश्विक पटल पर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को एक सशक्त पहचान भी दिलाता है।