क्या आपने कभी सोचा है कि आप वीडियो कॉल पर किसी दूर बैठे दोस्त से बात कर रहे हों और स्क्रीन पर दिख रहे केक या कॉफी की खुशबू आपको भी महसूस होने लगे? सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लग सकता है, लेकिन अमेरिका के वैज्ञानिकों ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी (Ohio State University) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी अत्याधुनिक प्रणाली विकसित की है, जिसकी मदद से अब डिजिटल माध्यमों से गंध (Scent) को भी एक जगह से दूसरी जगह भेजा जा सकता है। आइए जानते हैं कि यह अनोखी तकनीक कैसे काम करती है और इसके प्रयोग में क्या सामने आया है।


कैसे काम करती है यह डिजिटल गंध तकनीक?

इस पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि खुशबू असल में सफर कैसे करती है: सबसे दिलचस्प बात यह है कि खुशबू के असली अणु (Molecules) इंटरनेट के जरिए सफर करके दूसरे छोर तक नहीं पहुंचते। बल्कि, भेजने वाले की तरफ मौजूद उपकरण गंध को पहचान कर उसका डिजिटल डेटा रिसीवर तक भेजता है। इस सिस्टम में एक AI-संचालित "इलेक्ट्रॉनिक नाक" का इस्तेमाल होता है, जो हवा में मौजूद गंध को पहचानती है। दूसरे छोर पर 'Scentronic' नाम का एक विशेष रिसीवर लगा होता है, जो मिलने वाले डिजिटल डेटा के आधार पर अपने भीतर मौजूद सुगंध सामग्री से ठीक वैसी ही खुशबू दोबारा पैदा (Recreate) कर देता है।


प्रयोग में किन गंधों का हुआ परीक्षण?

शोधकर्ताओं ने इस तकनीक की सटीकता जांचने के लिए पांच अलग-अलग तरह की सुगंधों का परीक्षण किया:

  1. केक (Cake)
  2. बीयर (Beer)
  3. रेड वाइन (Red Wine)
  4. कॉफी (Coffee)
  5. संतरा (Orange)


इस परीक्षण के दौरान 16 लोगों के एक समूह को शामिल किया गया, और हैरानी की बात यह रही कि परीक्षण में शामिल सभी लोगों ने इन गंधों को बिल्कुल सही-सही पहचान लिया।


तकनीक को लेकर कुछ जरूरी बातें

इस रोमांचक खोज के साथ कुछ तकनीकी और व्यावहारिक सीमाएं भी जुड़ी हैं, जिन्हें समझना आवश्यक है: चूंकि इसके लिए दूसरे छोर पर ‘Scentronic’ जैसे विशेष रिसीवर या हार्डवेयर की आवश्यकता होती है, इसलिए आप सामान्य स्मार्टफोन में केवल कोई ऐप डाउनलोड करके इस सुविधा का लाभ नहीं उठा सकते। वैज्ञानिक जगत में डिजिटल सुगंध प्रणालियों (Digital Scent Technologies) पर पहले भी कई प्रयोग हो चुके हैं, इसलिए इसे दुनिया का पहला ऐसा प्रयास नहीं कहा जा सकता, हालांकि यह पिछले मॉडलों की तुलना में काफी उन्नत है।


फिलहाल यह तकनीक शोध और प्रयोगशाला के स्तर पर है। आने वाले समय में वर्चुअल रियलिटी (VR) और डिजिटल संचार के क्षेत्र में यह तकनीक एक बड़ा बदलाव ला सकती है।