नई दिल्ली। भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने के मामले में मध्य प्रदेश सरकार के जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की विशेष पीठ के समक्ष मध्य प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच पूरी कर ली गई है और विस्तृत जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में शीर्ष अदालत को सौंप दी गई है। हालांकि, मंत्री के खिलाफ अभियोजन (मुकदमा) चलाने की अंतिम वैधानिक मंजूरी अभी राज्यपाल के स्तर पर लंबित है।


राज्यपाल के निर्णय में फिलहाल हस्तक्षेप नहीं करेगा सुप्रीम कोर्ट

एसआईटी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) के. एम. नटराज ने अदालत को अवगत कराया कि राज्य मंत्रिमंडल स्तर पर विचार-विमर्श के बाद फाइल अंतिम निर्णय हेतु राज्यपाल मंगू भाई पटेल को भेजी गई है, जिस पर जल्द ही फैसला आने की संभावना है। इस पर न्यायमूर्ति बागची और सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि सक्षम प्राधिकारी (राज्यपाल) को इस पर स्वतंत्र निर्णय लेने दिया जाए। अदालत ने अभियोजन मंजूरी के इस चरण में सीधा दखल न देते हुए राज्यपाल के अंतिम फैसले का इंतजार करने का रुख अपनाया और सुनवाई को आगे के लिए स्थगित कर दिया।


मंजूरी न मिलने पर दाखिल होगी क्लोजर रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी व डीआईजी इंटेलिजेंस डी. कल्याण चक्रवर्ती ने अदालत को बताया कि जांच पूर्ण है और चार्जशीट अथवा क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए सक्षम स्तर से अभियोजन स्वीकृति आवश्यक है। सीजेआई द्वारा यह पूछे जाने पर कि यदि मंजूरी खारिज कर दी जाती है तो क्या प्रक्रिया होगी, एसआईटी के वकील ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में संबंधित अदालत में क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने जांच अधिकारी से कहा कि उनका कार्य पूर्ण हो चुका है, अतः अब उन्हें व्यक्तिगत रूप से बार-बार अदालत में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है; मंजूरी पर निर्णय आते ही रिपोर्ट संबंधित सक्षम अदालत में पेश की जाए।


कैबिनेट ने भेजा था अभियोजन न चलाने का प्रस्ताव, माफीनामे की दी दलील

विगत दिनों मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति न देने संबंधी प्रस्ताव पारित कर राज्यपाल को भेजा गया था। सरकार और मंत्री के वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह का तर्क रहा है कि विजय शाह घटना के अगले ही दिन सार्वजनिक मंचों और लिखित रूप में कई बार बिना शर्त माफी मांग चुके हैं। हालांकि, पूर्व की सुनवाइयों में सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन मंजूरी में हो रही देरी पर सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि आदेशों का समयबद्ध पालन किया जाए।


महू के कार्यक्रम में दिया था विवादित बयान

गौरतलब है कि मंत्री विजय शाह ने इंदौर के महू स्थित रायकुंडा गांव में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी के संदर्भ में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस बयान का मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामले की विस्तृत जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था।