मुंबई। हिंदी सिनेमा में कुछ सितारे ऐसे रहे हैं, जिनकी पहचान सिर्फ फिल्मों से नहीं, बल्कि उनके खास अंदाज से बनी। देव आनंद भी ऐसे ही कलाकार थे। उनकी चाल, बोलने का तरीका, कपड़े पहनने का स्टाइल और चेहरे की मुस्कान लंबे समय तक दर्शकों के बीच चर्चा में रही। उन्होंने करीब छह दशक तक फिल्मों में काम किया और एक्टर के साथ-साथ प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और राइटर के तौर पर भी अपनी पहचान बनाई। उम्र बढ़ने के बाद भी उनके फैंस का प्यार कभी कम नहीं हुआ था। उन्होंने 2011 में अपने 88वें बर्थडे पर बताया था कि उनके ऑफिस के बाहर फैंस विश करने के लिए इंतजार कर रहे थे।

देव आनंद का जन्म 26 सितंबर 1923 को हुआ था। उस समय उनका नाम धरमदेव पिशोरीमल आनंद था। उन्होंने लाहौर से इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई की। पढ़ाई के बाद वह 1943 में मुंबई पहुंचे। उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे और फिल्मी दुनिया में कोई बड़ा सहारा भी नहीं था। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि मुंबई आने के बाद करीब दो साल संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने शुरुआत में नौकरी भी की, लेकिन उनका सपना फिल्मों में काम करना था।

देव आनंद को 1946 में फिल्म 'हम एक हैं' में काम करने का मौका मिला। इसके बाद उन्हें 1948 में आई फिल्म 'जिद्दी' ने पहचान दिलाई। वह धीरे-धीरे हिंदी सिनेमा के बड़े स्टार्स में शामिल हो गए। उन्होंने अपने भाई चेतन आनंद के साथ मिलकर नवकेतन फिल्म्स की शुरुआत की। इस बैनर के तहत उन्होंने कई यादगार फिल्में बनाईं और नए कलाकारों को भी मौके दिए।

1950 और 60 का दशक देव आनंद के करियर का खास दौर रहा। इस दौरान उनकी 'बाजी', 'जाल', 'टैक्सी ड्राइवर', 'काला पानी', 'काला बाजार', 'गाइड' और 'ज्वेल थीफ' जैसी फिल्में रिलीज हुई। विजय आनंद के साथ उनकी जोड़ी ने 'गाइड', 'ज्वेल थीफ', 'काला बाजार' और 'जॉनी मेरा नाम' जैसी फिल्में दीं। उनके करियर की सबसे खास फिल्मों में 'गाइड' को भी गिना जाता है।

देव आनंद ने सिर्फ एक्टिंग नहीं की, बल्कि डायरेक्शन और प्रोडक्सन में भी हाथ आजमाया। 'प्रेम पुजारी', 'हरे राम हरे कृष्णा' और कई दूसरी फिल्मों के जरिए उन्होंने नए विषय और नए कलाकारों को जगह दी। वह अपने आखिरी समय तक फिल्मों को लेकर सक्रिय रहे। 2011 में आई 'चार्जशीट' उनकी आखिरी फिल्म थी। उन्होंने 88वें बर्थडे पर भी कहा था कि जब तक उनका शरीर और दिमाग साथ देगा, फिल्में बनाते रहेंगे।

देव आनंद को कई बड़े अवॉर्ड्स मिले। उन्हें 'काला पानी' और 'गाइड' के लिए फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड मिले। उन्हें 1991 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी मिला। उन्हें भारत सरकार ने 2001 में पद्म भूषण से सम्मानित किया और 2002 में दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड दिया गया।

देव आनंद का निधन 3 दिसंबर 2011 को लंदन में 88 साल की उम्र में हुआ।