छतरपुर/ईशानगर, शिवाकांत मिश्रा। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ईशानगर में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और चिकित्सकों की मनमानी का गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल में निर्धारित समय से पहले ही डॉक्टर के चले जाने से दूर-दराज से पहुंचे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके अलावा दवा वितरण में अनियमितता, स्टाफ द्वारा मरीजों से अभद्रता और बीएमओ डॉ. गिरीश साहू की लचर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर भी स्थानीय स्तर पर तीव्र आक्रोश देखा जा रहा है। मामले की शिकायत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) तक पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
दोपहर 1:30 बजे खाली मिला डॉक्टर का कक्ष, इंतजार में तड़पते रहे मरीज
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को दोपहर करीब 1:30 बजे तक बड़ी संख्या में मरीज और उनके तीमारदार ओपीडी में डॉक्टर की राह देखते रहे। आरोप है कि ड्यूटी चार्ट के मुताबिक डॉ. अदिति गुप्ता की तैनाती सुबह 8:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक निर्धारित थी, लेकिन वे ड्यूटी समय समाप्त होने से पहले ही अस्पताल छोड़कर चली गईं। ग्रामीण अंचलों से किराया खर्च कर इलाज की उम्मीद में आए बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे घंटों फर्श व कुर्सियों पर बैठकर डॉक्टर का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें कोई चिकित्सकीय परामर्श नहीं मिल सका।
सीएमएचओ को भेजा वीडियो, सत्यापन पर उठे सवाल
मरीजों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ड्यूटी समय में डॉक्टर के गायब रहने की सूचना तुरंत सीएमएचओ डॉ. राजेंद्र गुप्ता को दी गई। शिकायत के साथ साक्ष्य के तौर पर मौके का वीडियो बनाकर भी उच्चाधिकारियों को प्रेषित किया गया था। आरोप है कि इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा मौके पर डॉक्टर के मौजूद होने का दावा किया गया। ऐसे में स्थानीय नागरिकों का पूछना है कि क्या शिकायत मिलने के बाद मौके की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष भौतिक सत्यापन किया गया या फिर केवल मातहतों के बयानों के आधार पर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई।
आवास उपलब्ध होने के बाद भी मुख्यालय से गायब रहते हैं डॉक्टर और स्टाफ
ईशानगर स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर मुख्यालय में न रहने के भी गंभीर आरोप लगे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर में कर्मचारियों व डॉक्टरों के रहने के लिए शासकीय आवासीय भवन उपलब्ध हैं, इसके बावजूद अधिकांश डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ नौगांव व छतरपुर शहर से अप-डाउन करते हैं। मुख्यालय पर नियमित रूप से रात्रि विश्राम या आपातकालीन समय में न रुकने के कारण रात में आने वाले इमरजेंसी और प्रसव संबंधी मामलों में मरीजों को भारी असुविधा झेलनी पड़ती है।
फार्मासिस्ट के होते हुए अन्य कर्मचारियों से दवा वितरण, नर्स पर अभद्रता का आरोप
अस्पताल की आंतरिक व्यवस्थाओं और बीएमओ डॉ. गिरीश साहू की भूमिका पर भी सवालिया निशान लगे हैं। आरोप है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नियमित फार्मासिस्ट पुष्पेंद्र राजपूत के पदस्थ होने के बावजूद दवा वितरण जैसे संवेदनशील कार्य की जिम्मेदारी अन्य अप्रशिक्षित कर्मचारियों को सौंपी जाती है, जिससे गलत दवा वितरण की आशंका बनी रहती है। इसके अतिरिक्त, इलाज कराने आए मरीजों के साथ एक स्टाफ नर्स द्वारा बदसलूकी और अभद्र व्यवहार किए जाने की बात भी सामने आई है।
















