भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (CM Helpline) की पेंडिंग शिकायतों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कड़े रुख के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में 500 दिन या उससे भी अधिक समय से अटकी सैकड़ों शिकायतों के संतोषजनक समाधान न होने पर सरकार ने दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। इस सख्ती से घबराए अधिकारियों द्वारा आनन-फानन में रविवार को 500 लंबित शिकायतों को 'एकतरफा बंद' किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है।
लंबित शिकायतों पर अधिकारियों पर गिर रही गाज
शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद शिकायतों के निराकरण में हीलाहवाली करने वाले अफसरों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है: उज्जैन समेत कई जिलों में शिकायतों के निराकरण में लापरवाही बरतने पर तहसीलदारों जैसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की वेतन वृद्धि (Increment) रोकने और विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश जारी किए गए हैं। लंबे समय से पेंडिंग मामलों पर कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर कई जिम्मेदार अधिकारियों का वेतन रोकने के आदेश दिए गए हैं।
समीक्षा बैठक से पहले हड़कंप: रविवार को एकतरफा बंद की गई 500 शिकायतें
सोमवार को होने वाली सीएम हेल्पलाइन पेंडेंसी की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कार्रवाई के डर से अधिकारियों ने रविवार की छुट्टी के दिन ही सैकड़ों लंबित शिकायतों को पोर्टल से हटा दिया। 500 दिन से अधिक पुरानी शिकायतों के कारण जिलों और विभागों की सीएम हेल्पलाइन रैंकिंग लगातार गिर रही थी। प्रशासनिक बैठकों में सख्त जवाबदेही से बचने के लिए विभागीय स्तर पर बिना आवेदकों की संतुष्टि के ही 'एकतरफा जवाब' दर्ज कर रिकॉर्ड में इन शिकायतों को निराकृत (Closed) बता दिया गया।
विशेष समीक्षा के दायरे में 500 दिन पुरानी शिकायतें
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ किया है कि 500 दिन या उससे अधिक समय से पेंडिंग शिकायतों की विशेष समीक्षा की जाएगी। यदि जांच के दौरान शिकायतों को केवल कागजों पर या जबरन बंद करना पाया गया, तो संबंधित विभाग और जोनल/क्षेत्रीय अधिकारियों पर और अधिक कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।




