बालाघाट। जिले के बिरसा विकासखंड अंतर्गत सुदूर आदिवासी अंचल में फैली अज्ञात महामारी, मलेरिया, कुपोषण और नियमित टीकाकरण के अभाव के चलते 24 मासूम बच्चों की असमय मौत का मामला सामने आया है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौतों से शासन-प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल शनिवार को सीधे ग्राउंड जीरो पर पहुंचे और घोर लापरवाही बरतने वाले दो वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया।
टीकाकरण और मलेरिया अधिकारी पर गिरी गाज
स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने प्रशासनिक समीक्षा के बाद जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. परेश उपलप और जिला मलेरिया अधिकारी मनीषा जुनेजा को उनके पदों से हटाते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। मंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि बच्चों की सेहत और स्वास्थ्य सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मछुरदा गांव पहुंचे डिप्टी सीएम, एएनएम तैनाती के निर्देश
डिप्टी सीएम ने महामारी से सर्वाधिक प्रभावित ग्राम मछुरदा का स्थलीय निरीक्षण किया और पीड़ित बैगा आदिवासी परिवारों से बातचीत की। इस दौरान एक ग्रामीण महिला ने अस्पताल भवन होने के बावजूद डॉक्टर न होने की पीड़ा बताई। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को तत्काल गांव में एएनएम (ANM) की पदस्थापना सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए।
विशेष टीकाकरण अभियान शुरू, सीएम खुद रख रहे नजर
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि यह क्षेत्र दशकों के संघर्ष के बाद हाल ही में नक्सल मुक्त हुआ है, इसलिए सरकार यहां शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रभावित बस्तियों में खसरा-रूबेला सहित अन्य बीमारियों से बचाव के लिए युद्धस्तर पर विशेष टीकाकरण अभियान, डीडीटी/दवा छिड़काव और पोषण आहार वितरण शुरू किया गया है। पूरी स्थिति की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा की जा रही है। प्रशासन ने अतिरिक्त स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती के साथ गांवों में जागरूकता शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं ताकि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति आदिवासियों का भरोसा बहाल किया जा सके।




