एमस्टेलवीन। एफआईएच विमेंस हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में रविवार को भारतीय महिला टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अहम मुकाबला खेलेगी। यह मैच 'पूल-ई' से सेमीफाइनल में जाने का रास्ता तय करने के लिए निर्णायक होगा। दोनों टीमों के पास एक-एक अंक हैं, जो टीम इस मुकाबले को अपने नाम करेगी, वह आगे बढ़ने की सबसे मजबूत स्थिति में होगी। हालांकि, अंतिम समीकरण रविवार को नीदरलैंड और चीन के बीच होने वाले मैच के नतीजों पर भी निर्भर करेगा।

मेजबान नीदरलैंड ने शुक्रवार को भारत के खिलाफ 2-0 से जीत हासिल की थी। इसी के साथ मौजूदा चैंपियन ने सेमीफाइनल में अपनी जगह सुनिश्चित कर ली। डच टीम ने ग्रुप-ई के अपने दोनों मैच जीते हैं। इस टीम के पास 6 अंक हैं। वहीं, चीन के दो प्वाइंट्स हैं। रविवार शाम 7:30 बजे नीदरलैंड और चीन के बीच मैच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, जबकि भारत का ऑस्ट्रेलिया के बीच मुकाबला रात 10:30 बजे से होगा।

भारत को अगर सेमीफाइनल में पहुंचना है, तो उसे ऑस्ट्रेलियाई टीम को हराना होगा, लेकिन अगर चीन मेजबान टीम को शिकस्त देती है, तो उनके पांच प्वाइंट्स हो जाएंगे, जिसके बाद भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों की उम्मीदें खत्म हो जाएंगी। हालांकि, अगर वह मैच ड्रॉ रहता है या चीन हार जाता है, तो भारत को आगे बढ़ने और इतिहास रचने के लिए ऑस्ट्रेलिया पर सीधी जीत की जरूरत होगी।

इस साल की शुरुआत में एफआईएच नेशंस कप से ठीक पहले चार मुकाबलों की सीरीज के दौरान भारत-ऑस्ट्रेलिया की टीमों ने एक-दूसरे को अच्छी तरह परखा था। कड़े मुकाबले वाली उस सीरीज का नतीजा 2-2 से ड्रॉ रहा था। इससे पता चलता है कि आमने-सामने की टक्कर में टीमें कितनी बराबरी की हैं।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बड़े मैच से पहले, भारत को मजबूत डच टीम के खिलाफ अपने अच्छे प्रदर्शन से आत्मविश्वास मिलेगा। शुरुआती गोल खाने के बावजूद, भारतीय डिफेंस शांत और अनुशासित रहा, जिसने लंबे समय तक मेजबान टीम को परेशान किया और यह सुनिश्चित किया कि वे कोई फील्ड गोल न खाएं। पूरे टूर्नामेंट में डिफेंसिव यूनिट भारत की सबसे बड़ी ताकतों में से एक रही है, जिसमें दिग्गज गोलकीपर सविता और बिचू देवी ने गोलपोस्ट के बीच भरोसेमंद मौजूदगी दिखाई है।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ, डिफेंस की वह मजबूती फिर से अहम होगी, लेकिन भारत को अटैकिंग थर्ड में भी ज्यादा बेहतर प्रदर्शन की जरूरत होगी। टीम ने ओपन प्ले और पेनाल्टी कॉर्नर दोनों के जरिए मौके बनाए हैं। अब इन मौकों को गोल में बदलना जरूरी है, जो ऐसे मैच में निर्णायक साबित हो सकता है जहां जीत-हार का अंतर बहुत कम होने की संभावना है।