छत्तीसगढ़/धरमजयगढ़, रोहित तिर्की - एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, लैलूंगा (धरमजयगढ़) इन दिनों विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए आरोपों और शिकायतों को लेकर चर्चा में है। इन शिकायतों की वास्तविकता जानने और तथ्यों के आधार पर रिपोर्टिंग करने के उद्देश्य से रायगढ़ जिले के पत्रकार एवं Peptech Time के संवाददाता रोहित तिर्की ने सहायक आयुक्त (ए.सी.) श्रीकांत दुबे, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, रायगढ़ को विधिवत आवेदन प्रस्तुत कर विद्यालय परिसर में प्रवेश करने तथा विद्यार्थियों से बातचीत करने की अनुमति मांगी है।
आवेदन में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि रिपोर्टिंग का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था की छवि धूमिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों द्वारा उठाए गए मुद्दों की निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच कर वास्तविक स्थिति को सामने लाना है। पत्रकार ने विद्यालय का निरीक्षण करने, विद्यार्थियों से स्वतंत्र रूप से बातचीत करने तथा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर समाचार संकलित करने की अनुमति का अनुरोध किया है।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग इस आवेदन पर क्या निर्णय लेता है। यदि विभाग अनुमति प्रदान करता है, तो इससे यह संदेश जाएगा कि विभाग पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की भावना में विश्वास रखता है तथा विद्यालय में सब कुछ व्यवस्थित होने का भरोसा सार्वजनिक रूप से दिखाने के लिए तैयार है।
दूसरी ओर, यदि अनुमति अस्वीकार की जाती है, तो उसके पीछे विभाग द्वारा बताए गए आधिकारिक कारण अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे। यदि विभाग स्पष्ट और वैधानिक कारणों के साथ निर्णय देता है, तो उसका मूल्यांकन उसी आधार पर किया जाएगा। वहीं यदि बिना पर्याप्त कारण के अनुमति नहीं दी जाती, तो स्वाभाविक रूप से कई सवाल उठ सकते हैं कि विद्यार्थियों की शिकायतों की स्वतंत्र पड़ताल क्यों नहीं होने दी गई।
शिक्षा से जुड़े मामलों में पारदर्शिता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेषकर आवासीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थी लंबे समय तक संस्थान के भीतर रहते हैं। ऐसे में यदि उनके द्वारा किसी प्रकार की शिकायत की जाती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और वस्तुस्थिति का सामने आना सार्वजनिक हित का विषय माना जाता है।
सूचना के अधिकार, पारदर्शी प्रशासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना भी यही कहती है कि सार्वजनिक संस्थानों में उठने वाले गंभीर प्रश्नों का उत्तर तथ्यों के माध्यम से दिया जाना चाहिए। यदि विद्यालय में व्यवस्थाएं संतोषजनक हैं, तो स्वतंत्र निरीक्षण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग से विभाग तथा विद्यालय दोनों की विश्वसनीयता और मजबूत हो सकती है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सहायक आयुक्त श्रीकांत दुबे इस आवेदन पर क्या निर्णय लेते हैं। क्या पत्रकार को विद्यालय में प्रवेश कर विद्यार्थियों से बातचीत करने की अनुमति मिलेगी, या फिर विभाग किसी प्रशासनिक अथवा अन्य वैधानिक कारण का हवाला देते हुए आवेदन को अस्वीकार करेगा? विभाग के निर्णय पर न केवल स्थानीय लोगों बल्कि अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और मीडिया की भी निगाहें टिकी हुई हैं।
फिलहाल, आवेदन विचाराधीन है और विभाग की ओर से अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा की जा रही है। अनुमति मिलने या विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।




