भोपाल। मध्यप्रदेश में निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में नियुक्तियों के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद का नियुक्ति आदेश फर्जी निकला। इस फर्जी आदेश ने न सिर्फ भाजपा नेताओं बल्कि उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल तक को भ्रमित कर दिया। वायरल आदेश में भाजपा नेता वीरेंद्र गोयल को सिंगरौली विकास प्राधिकरण का नया अध्यक्ष बताया गया था। आदेश पर 1 मई की तारीख दर्ज थी। इसके बाद भाजपा नेताओं और समर्थकों के बीच बधाइयों और मिठाई खिलाने का दौर शुरू हो गया। कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से वीरेंद्र गोयल को शुभकामनाएं दीं। बताया जा रहा है कि इस दौरान डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल भी मौजूद रहे।


वीरेंद्र गोयल भाजपा के वरिष्ठ नेता और सिंगरौली जिले के पूर्व जिलाध्यक्ष रह चुके हैं, इसलिए आदेश को लेकर किसी को संदेह नहीं हुआ। लेकिन जब यह मामला मंत्रालय पहुंचा तो पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि फरवरी में जारी आदेश, जिसमें विभिन्न निगम-मंडलों और प्राधिकरणों की पुरानी कार्यकारिणी भंग की गई थी, उसमें सिंगरौली विकास प्राधिकरण का नाम शामिल ही नहीं किया गया था। ऐसे में पुराने प्राधिकरण को भंग किए बिना नए अध्यक्ष की नियुक्ति संभव नहीं थी। इसी दौरान अधिकारियों को अपनी पहले की प्रशासनिक चूक का भी पता चला। इसके बाद विभागीय स्तर पर आदेश की जांच की गई और स्पष्ट किया गया कि सिंगरौली विकास प्राधिकरण अध्यक्ष पद के लिए कोई आधिकारिक नियुक्ति आदेश जारी नहीं हुआ था। विभाग के अपर मुख्य सचिव ने पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भी दे दी है। गौरतलब है कि इससे पहले भी सोशल मीडिया पर निगम-मंडलों की फर्जी नियुक्ति सूचियां वायरल होने के मामले सामने आ चुके हैं।